वीडियोकॉन प्रमोटर वेणुगोपाल धूत दिवालिया घोषित, सिर पर है 12668 करोड़ का कर्ज

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कभी देश के बड़े कारोबारी समूहों में शामिल वीडियोकॉन के पूर्व प्रमोटर वेणुगोपाल धूत को बड़ा झटका लगा है. NCLT ने उन्हें दिवालिया घोषित कर दिया है. ये फैसला भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की याचिका पर सुनाया गया है.

बैंक के मुताबिक, धूत पर ब्याज और जुर्माने समेत करीब 12,668 करोड़ रुपए बकाया हैं. अब उनकी संपत्तियों के प्रबंधन और कर्जदाताओं को पेमेंट का प्रोसेस शुरू होगा. यहां से जानें कि आखिर NCLT ने धूत को दिवालिया क्यों घोषित किया और अब उनकी संपत्ति का क्या होगा. 

NCLT ने क्यों घोषित किया दिवालिया?
NCLT की मुंबई पीठ ने 5 नवंबर को वेणुगोपाल नंदलाल धूत को दिवालिया घोषित करने का आदेश दिया है. दरअसल, धूत ने वीडियोकॉन समूह की कंपनियों की ओर से लिए गए कर्ज के लिए व्यक्तिगत गारंटी दी थी. इसका मतलब है कि अगर कंपनी कर्ज नहीं चुका पाती है तो गारंटर के तौर पर धूत की जिम्मेदारी भी बनती है.

वीडियोकॉन समूह की कंपनियां जब कर्ज चुकाने में नाकाम रहीं तो SBI समेत कर्जदाताओं ने फरवरी 2018 में इन गारंटियों को लागू किया. इसके बाद धूत के खिलाफ व्यक्तिगत दिवालियापन से जुड़ी प्रक्रिया शुरू हुई. बैंक के अनुसार, 30 सितंबर 2026 तक ब्याज और जुर्माने सहित टोटल बकाया रकम 12,668.06 करोड़ रुपए पहुंच गई थी.

क्या दिया था प्रस्ताव? 

दिवालिया घोषित होने से पहले धूत ने कर्ज चुकाने के लिए एक प्रस्ताव भी दिया था. इसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में रियल एस्टेट प्रोजेक्ट विकसित करके 36 महीने में 600 करोड़ रुपए चुकाने की बात कही थी. हालांकि, कर्जदाताओं ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया. इसकी एक बड़ी वजह ये थी कि पेमेंट भविष्य में प्रोजेक्ट के विकास, जरूरी मंजूरियों और उससे होने वाली कमाई पर निर्भर था. इसमें तुरंत कोई रकम चुकाने की बात भी नहीं थी.

धूत की संपत्ति का क्या होगा?
NCLT ने इस पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए आशीष नारायण को दिवालियापन ट्रस्टी नियुक्त किया है. अब धूत की संपत्ति का प्रबंधन ट्रस्टी के हाथ में रहेगा. इन संपत्तियों का इस्तेमाल कानून के मुताबिक कर्जदाताओं को पेमेंट करने के लिए किया जाएगा.

ट्रिब्यूनल ने धूत को 7 दिनों के भीतर अपनी पूरी वित्तीय स्थिति का ब्योरा ट्रस्टी को सौंपने का निर्देश दिया है. वहीं, ट्रस्टी को कर्जदाताओं को सूचना देने, सार्वजनिक नोटिस जारी कर दावे मंगाने और दिवालियापन प्रक्रिया शुरू होने के 90 दिनों के भीतर शुरुआती रिपोर्ट जमा करने को कहा गया है.

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