अमेरिका से लेकर जापान-कोरिया में हाहाकार! रविवार को मुहूर्त ट्रेडिंग से पहले हिला मार्केट

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  • अमेरिकी मध्यावधि चुनाव हार के बाद एशियाई बाजार में गिरावट.
  • जापान, दक्षिण कोरियाई बाजारों में भारी गिरावट; कोस्पी पर सर्किट.
  • वैश्विक कमजोरी के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में आज उछाल.
  • डेमोक्रेट्स द्वारा सख्त टेक नियम; अधिग्रहण रोकने की संभावना बढ़ी.

वैश्विक शेयर बाजारों में आज ‘ब्लैक फ्राइडे’ जैसी स्थिति देखने को मिल रही है. वॉल स्ट्रीट पर हुए बड़े नुकसान का असर आज सप्ताह के आखिरी कारोबारी सत्र यानी शुक्रवार को एशियाई बाजारों पर भी देखने को मिला. हाल ही में हुए अमेरिकी मध्यावधि चुनावों (US Midterm Elections 2026) में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और टेक्नोलॉजी शेयरों में भारी बिकवाली के चलते निवेशकों का भरोसा डगमगा गया.

आज एशियाई बाजारों में इसी का तगड़ा असर देखने को मिल रहा है. एक तरफ जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 6% तक लुढ़क चुका है. टॉपिक्स में भी 5.2% की गिरावट आई है. दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) भी लगभग 9% लुढ़क गया, जिसके कारण सर्किट ब्रेकर लग गए और 20 मिनट के लिए कारोबार रोकना पड़ा. वहीं, ऑस्ट्रेलिया का ASX 200 इंडेक्स 0.7% और न्यूजीलैंड का NZX 50 इंडेक्स लगभग 0.5% नीचे आ गया.

भारतीय बाजार में तेजी का माहौल

एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली के बाद भी भारतीय शेयर बाजार में आज शुक्रवार, 6 नवंबर को तेजी के साथ कारोबार शुरू हुआ. सुबह BSE सेंसेक्स 271.68 अंक (0.34%) की बढ़त के साथ 79,581.69 के स्तर पर पहुंच गया. वहीं, NSE निफ्टी में भी शुरुआती कारोबार में मजबूती देखने को मिली.

गुरुवार को विदेशी निवेशकों की खरीदारी, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और सकारात्मक घरेलू संकेतों के चलते बाजार में जोरदार तेजी दर्ज की गई थी. हालांकि, अमेरिकी टेक शेयरों में गिरावट और एशियाई बाजारों में कमजोरी के कारण निवेशक सतर्क हैं. बाजार की आगे की दिशा वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी.

टेक कंपनियों को किस बात का डर?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पार्टी रिपब्लिकन एआई और टेक कंपनियों पर कम से कम नियम लगाने के पक्ष में रहे हैं ताकि चीन के साथ एआई (AI) की रेस में अमेरिकी पीछे न रह जाए. ट्रंप प्रशासन का मानना है कि अगर अमेरिका ने Nvidia, Google, Microsoft, OpenAI जैसी अपनी एआई और टेक कंपनियों पर कड़े नियम या प्रतिबंध लगाए, तो अमेरिका इस तकनीकी दौड़ में चीन से पिछड़ जाएगा. इसके उलट, डेमोक्रेटिक पार्टी डेटा गोपनीयता, एआई सुरक्षा को लेकर बेहद सख्त नियम बनाने की वकालत करती आई है.

डेमोक्रेटिक पार्टी यूरोपीय संघ के GDPR (General Data Protection Regulation) की तर्ज पर अमेरिका में भी एक सख्त केंद्रीय डेटा गोपनीयता कानून लाने के पक्ष में है. डेमोक्रेट्स एआई सुरक्षा और एथिक्स को लेकर भी कड़े हैं. डेमोक्रेट्स का मानना है कि किसी भी बड़े एआई मॉडल को सार्वजनिक रूप से जारी करने से पहले उसका कड़ा सरकारी सेफ्टी टेस्ट और रिस्क असेसमेंट होना अनिवार्य होना चाहिए. वर्मोंट के सीनियर सेनेटर बर्नी सैंडर्स जैसे नेताओं द्वारा एआई के अत्यधिक बिजली और पानी की खपत को देखते हुए देशव्यापी नए डेटा सेंटर्स के निर्माण पर रोक लगाने की मांग उठाई जा रही है.

सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन और सीनेटर बर्नी सैंडर्स जैसे डेमोक्रेटिक पार्टी के कई बड़े नेता लंबे समय से गूगल, अमेजन जैसी बिग टेक कंपनियों के एकाधिकार को तोड़ने की वकालत करते आए हैं. अब संसद के दोनों सदनों में बहुमत होने के कारण डेमोक्रेट्स टेक कंपनियों द्वारा छोटी कंपनियों को खरीदने या बड़े विलय करने के प्रस्तावों को आसानी से ब्लॉक कर सकेंगे, जिससे इन कंपनियों का मार्केट कंसॉलिडेशन रुक जाएगा.

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