संजीव कुमार की याद में भावुक हुए जैकी श्रॉफ, पुरानी तस्वीर के साथ लिखी दिल छू लेने वाली बात

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बॉलीवुड  एक्टर  जैकी श्रॉफ अपनी सादगी और पुराने कलाकारों के प्रति सम्मान जताने के अंदाज के लिए जाने जाते हैं. वह अक्सर सोशल मीडिया पर फिल्मी दुनिया से जुड़ी यादें और दिग्गज कलाकारों की तस्वीरें शेयर करते रहते हैं. इस बार उन्होंने हिंदी सिनेमा के  मशहूर एक्टर संजीव कुमार को उनकी पुण्यतिथि पर याद किया और एक खास पोस्ट के जरिए उन्हें श्रद्धांजलि दी.

जैकी श्रॉफ ने संजीव कुमार की एक ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर शेयर की और उनके लिए अपना प्यार जताया. जैकी ने तस्वीर के साथ लिखा, ‘हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे.’ इस पोस्ट के साथ जैकी ने साल 1972 में आई फिल्म ‘परिचय’ का मशहूर गाना ‘बीती ना बिताई रैना’ भी लगाया. लता मंगेशकर और भूपिंदर सिंह की आवाज में गाए गए इस गाने में संजीव कुमार और जया बच्चन नजर आए थे.

संजीव कुमार की याद में भावुक हुए जैकी श्रॉफ, पुरानी तस्वीर के साथ लिखी दिल छू लेने वाली बात

संजीव कुमार का असली नाम

संजीव कुमार का जन्म 9 जुलाई 1938 को गुजरात के सूरत में हरिभाई जरीवाला के रूप में हुआ था. उन्होंने अपने दौर के दूसरे बड़े एक्टर्स से अलग रोमांटिक हीरो के साथ-साथ कॉमेडी किरदार, पिता और उम्रदराज लोगों की भूमिकाएं भी बेहद सहजता से निभाईं.

फिल्म ‘खिलौना’ से संजीव कुमार को बड़ी पहचान मिली. इसके बाद उन्होंने कई ऐसी फिल्मों में काम किया, जिनमें उनके  एक्टिंग  की खूब तारीफ हुई. उन्हें फिल्म ‘दस्तक’ और ‘कोशिश’ के लिए सर्वश्रेष्ठ एक्टर के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले. उन्होंने फिल्म ‘कोशिश’ में एक ऐसे व्यक्ति का किरदार निभाया था, जो सुन और बोल नहीं सकता था.

संजीव कुमार ने अपने करियर में कई यादगार फिल्मों में काम किया. इनमें ‘शोले’ भी शामिल है, जिसमें उन्होंने ठाकुर बलदेव सिंह का आइकॉनिक किरदार निभाया था. इसके अलावा ‘अंगूर’ में उनका डबल रोल, ‘आंधी’, ‘मौसम‘, ‘त्रिशूल’, ‘सीता और गीता’, ‘नमकीन’, ‘अनामिका’, ‘पति पत्नी और वो’ जैसी फिल्मों में उनके एक्टिंग को काफी पसंद किया गया. फिल्म ‘नया दिन नई रात’ में तो उन्होंने एक साथ नौ अलग-अलग किरदार निभाए थे. इस फिल्म में उनके एक्टिंग के अलग-अलग रंग देखने को मिले.

निधन के बाद भी रिलीज हुईं फिल्में

संजीव कुमार के निधन के बाद भी उनकी कई फिल्में रिलीज हुईं. इनमें ‘लव एंड गॉड’, ‘हाथों की लकीरें’, ‘कत्ल’, ‘बात बन जाए’, ‘नामुमकिन’ और ‘प्रोफेसर की पड़ोसन’ शामिल हैं. उनकी आखिरी फिल्मों में शामिल ‘प्रोफेसर की पड़ोसन’ साल 1993 में रिलीज हुई थी.

 



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