Parents Teacher Meeting: पेरेंट्स को खुश करना रह गया PTM का मकसद, स्कूलों के तरीकों पर क्यों उठ रहे सवाल?


लेकिन आज के समय में देश के महंगे और इंटरनेशनल प्राइवेट स्कूलों में पीटीएम की तस्वीर पूरी तरह बदलती दिखाई दे रही है. पेरेंट्स का एक्सपीरियंस है कि अभी यह मीटिंग बच्चों के विकास पर सही-सही चर्चा से ज्यादा पेरेंट्स को खुश रखने और हॉस्पिटैलिटी विजिट जैसा माहौल देने का जरिया बनती जा रही है. मीटिंग के दौरान टीचर्स के लहजे में ज्यादा सावधानी और मीठे बोल देखने को मिलते हैं और आखिर में एक ही सवाल पर पूरा जोर होता है कि क्या आप स्कूल की फैसिलिटी से संतुष्ट हैं.

लेकिन आज के समय में देश के महंगे और इंटरनेशनल प्राइवेट स्कूलों में पीटीएम की तस्वीर पूरी तरह बदलती दिखाई दे रही है. पेरेंट्स का एक्सपीरियंस है कि अभी यह मीटिंग बच्चों के विकास पर सही-सही चर्चा से ज्यादा पेरेंट्स को खुश रखने और हॉस्पिटैलिटी विजिट जैसा माहौल देने का जरिया बनती जा रही है. मीटिंग के दौरान टीचर्स के लहजे में ज्यादा सावधानी और मीठे बोल देखने को मिलते हैं और आखिर में एक ही सवाल पर पूरा जोर होता है कि क्या आप स्कूल की फैसिलिटी से संतुष्ट हैं.

ऐसे में पेरेंट्स को लगने लगा है कि PTM में सच पर पर्दा डाला जाने लगा है. इसे लेकर कुछ पेरेंट्स के एक्सपीरियंस भी सामने आए हैं, जिसमें एक पेरेंट्स बताते हैं कि उनके समय में शिक्षक बिना किसी डर के माता-पिता को बच्चों की कमियां बता देते थे, क्योंकि उन्हें स्कूल मैनेजमेंट से किसी फटकार या शिकायत का डर नहीं होता था. लेकिन आज के दौर में टीचर्स बहुत सतर्क रहते हैं और खुलकर अपनी बात करने से बचते हैं.

ऐसे में पेरेंट्स को लगने लगा है कि PTM में सच पर पर्दा डाला जाने लगा है. इसे लेकर कुछ पेरेंट्स के एक्सपीरियंस भी सामने आए हैं, जिसमें एक पेरेंट्स बताते हैं कि उनके समय में शिक्षक बिना किसी डर के माता-पिता को बच्चों की कमियां बता देते थे, क्योंकि उन्हें स्कूल मैनेजमेंट से किसी फटकार या शिकायत का डर नहीं होता था. लेकिन आज के दौर में टीचर्स बहुत सतर्क रहते हैं और खुलकर अपनी बात करने से बचते हैं.

इसे लेकर एक और पेरेंट्स बताते हैं कि अब पेरेंट्स इतने विनम्र होने की कोशिश करते हैं कि अगर कोई बड़ा जरूरी फीडबैक भी देना हो उसे इतना शुगरकोट कर दिया जाता है कि बच्चे पर उसका कोई असर ही नहीं पड़ता. इसका रिजल्ट यह होता है कि बच्चों के मन में टीचर्स का डर खत्म हो रहा है.

इसे लेकर एक और पेरेंट्स बताते हैं कि अब पेरेंट्स इतने विनम्र होने की कोशिश करते हैं कि अगर कोई बड़ा जरूरी फीडबैक भी देना हो उसे इतना शुगरकोट कर दिया जाता है कि बच्चे पर उसका कोई असर ही नहीं पड़ता. इसका रिजल्ट यह होता है कि बच्चों के मन में टीचर्स का डर खत्म हो रहा है.

स्कूलों कि बदलती व्यवस्था के पीछे फीडबैक फॉर्म और मैनेजमेंट का बढ़ता दबाव भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है. पेरेंट्स का कहना है कि जब टीचर पेरेंट्स को फीडबैक या रिव्यू फॉर्म देते हैं, तो उनका पूरा ध्यान अपनी अच्छी रेटिंग पर होता है. टीचर चाहते हैं कि मैनेजमेंट को यह मैसेज जाए कि वह पेरेंट्स को बहुत अच्छी तरह संभाल रहे हैं. इस तरह इस रेटिंग के माहौल के चलते सीधी और पारदर्शी बातचीत घट रही है.

स्कूलों कि बदलती व्यवस्था के पीछे फीडबैक फॉर्म और मैनेजमेंट का बढ़ता दबाव भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है. पेरेंट्स का कहना है कि जब टीचर पेरेंट्स को फीडबैक या रिव्यू फॉर्म देते हैं, तो उनका पूरा ध्यान अपनी अच्छी रेटिंग पर होता है. टीचर चाहते हैं कि मैनेजमेंट को यह मैसेज जाए कि वह पेरेंट्स को बहुत अच्छी तरह संभाल रहे हैं. इस तरह इस रेटिंग के माहौल के चलते सीधी और पारदर्शी बातचीत घट रही है.

वहीं आज के समय में प्राइवेट एजुकेशन मार्केट में जहां स्कूल अपनी प्रीमियम सुविधाओं, इंटरनेशनल प्रोग्राम और पर्सनल अटेंशन काे एडवर्टाइज करते है, वहां पर पेरेंट्स अब केवल बच्चों के फ्यूचर के साझेदारी नहीं बल्कि एक तरह के कस्टमर बन गए हैं.

वहीं आज के समय में प्राइवेट एजुकेशन मार्केट में जहां स्कूल अपनी प्रीमियम सुविधाओं, इंटरनेशनल प्रोग्राम और पर्सनल अटेंशन काे एडवर्टाइज करते है, वहां पर पेरेंट्स अब केवल बच्चों के फ्यूचर के साझेदारी नहीं बल्कि एक तरह के कस्टमर बन गए हैं.

एजुकेशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि पैरेंट टीचर मीटिंग का असली मकसद कभी भी पेरेंट्स को खुश करना या स्कूल की ब्रांडिंग को बेहतर दिखना नहीं था. PTM का मुख्य उद्देश्य पेरेंट्स और टीचर्स को एक साथ लाकर बच्चों के भविष्य के लिए एक अनफिल्टर्ड डिस्कशन करना था. लेकिन अब बदलती पीटीएम को लेकर कई एक्सपर्ट्स ने चिंता जताई है. 

एजुकेशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि पैरेंट टीचर मीटिंग का असली मकसद कभी भी पेरेंट्स को खुश करना या स्कूल की ब्रांडिंग को बेहतर दिखना नहीं था. PTM का मुख्य उद्देश्य पेरेंट्स और टीचर्स को एक साथ लाकर बच्चों के भविष्य के लिए एक अनफिल्टर्ड डिस्कशन करना था. लेकिन अब बदलती पीटीएम को लेकर कई एक्सपर्ट्स ने चिंता जताई है. 

Published at : 08 Nov 2026 02:16 PM (IST)

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