- विदेशी निवेशकों ने तीन दिन में ₹29,096 करोड़ का निवेश किया.
- कच्चे तेल कीमतों में गिरावट, भारत के लिए बड़ा लाभ.
- अमेरिकी बॉन्ड, AI चिंताओं से भारत निवेश को आकर्षक बना.
भारतीय शेयर बाजार के लिए विदेशी निवेशकों की तरफ से अच्छी खबर आई है. लंबे समय तक लगातार बिकवाली करने के बाद विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर बड़ी खरीदारी शुरू कर दी है.
सिर्फ तीन कारोबारी दिनों में विदेशी निवेशकों ने करीब 29,096 करोड़ रुपये भारतीय शेयरों में लगाए हैं. इस अचानक आए निवेश से बाजार में उत्साह बढ़ा है. लेकिन सवाल यह है कि आखिर किन वजहों से विदेशी निवेशकों का रुख भारत की तरफ दोबारा बदला है?
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत को फायदा
विदेशी निवेशकों की वापसी के पीछे एक बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट है. 4 नवंबर को ब्रेंट क्रूड करीब 9 प्रतिशत गिरकर 94.62 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया था.
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से कच्चा तेल खरीदता है. ऐसे में तेल सस्ता होने से देश का आयात बिल कम हो सकता है. साथ ही महंगाई पर दबाव घटने और कंपनियों की लागत कम होने की उम्मीद रहती है. इसका फायदा एविएशन, पेंट, केमिकल और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टरों को मिल सकता है.
तीन दिनों में हुई करीब 29 हजार करोड़ की खरीदारी
आंकड़ों के मुताबिक, 3 नवंबर से 5 नवंबर 2026 के बीच FIIs ने भारतीय शेयर बाजार में कुल 29,095.52 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की.
- 3 नवंबर: 6,836.81 करोड़ रुपये
- 4 नवंबर: 7,284.03 करोड़ रुपये
- 5 नवंबर: 14,974.68 करोड़ रुपये
5 नवंबर को विदेशी निवेशकों की खरीदारी सबसे ज्यादा रही. इससे पहले जनवरी से अक्टूबर 2026 के दौरान विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से करीब 30 अरब डॉलर निकाल चुके थे.
AI शेयरों से दूरी और भारत में निवेश की उम्मीद
अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के ऊंचे वैल्यूएशन को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं. ऐसे में निवेशक अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए दूसरे बाजारों की तरफ देख रहे हैं. भारत का शेयर बाजार बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और घरेलू खपत जैसे क्षेत्रों पर अधिक निर्भर है. इसलिए विदेशी निवेशकों के लिए भारत एक विकल्प बन सकता है.
क्या आगे भी जारी रहेगी विदेशी निवेशकों की खरीदारी?
भारतीय शेयरों के वैल्यूएशन में पहले के मुकाबले सुधार और विदेशी निवेशकों की कम हिस्सेदारी भी वापसी की एक वजह मानी जा रही है. हालांकि, इन तीन दिनों में जहां FIIs ने खरीदारी की, वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने करीब 17,835.62 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की.
विशेषज्ञों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों की वापसी कितने समय तक बनी रहेगी, यह कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की स्थिति, अमेरिकी ब्याज दरों और भारतीय कंपनियों की कमाई पर निर्भर करेगा. इसलिए केवल तीन दिनों की खरीदारी को बाजार में स्थायी तेजी का संकेत मानना जल्दबाजी होगी.
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट भी बनी वजह
अमेरिका के सरकारी बॉन्ड की यील्ड में भी कमी आई है. 3 से 5 नवंबर के बीच 10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 4.95 प्रतिशत से घटकर 4.84 प्रतिशत पर आ गई. इससे विदेशी निवेशकों के लिए उभरते बाजारों में निवेश करना अपेक्षाकृत आकर्षक हो सकता है.
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