Newborn Baby Vaccine Guide: एक नवजात शिशु का दुनिया में आना माता-पिता और पूरे परिवार के लिए सबसे बड़ी खुशी का पल होता है. जन्म के बाद डॉक्टर और नर्स बच्चे की सेहत की जांच करते हैं और उसे कुछ जरूरी टीके व सप्लीमेंट्स देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जन्म के ठीक बाद बच्चे को दिया जाने वाला एक छोटा सा इंजेक्शन उसकी जिंदगी बचाने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी होता है.
हाल ही में आई वैश्विक चिकित्सा शोध और बाल रोग विशेषज्ञों की एक नई रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई है कि अगर नवजात शिशु को जन्म के तुरंत बाद विटामिन K का इंजेक्शन नहीं लगाया गया, तो उसमें शरीर के अंदरूनी हिस्सों में अचानक ब्लीडिंग का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. चिकित्सा विज्ञान में इस गंभीर और जानलेवा स्थिति को विटामिन के डेफिशिएंसी ब्लीडिंग कहा जाता है.
आखिर शिशुओं में क्यों होती है विटामिन के की कमी?
नवजात शिशुओं में जन्म के समय प्राकृतिक रूप से विटामिन K की भारी कमी होती है. इसके पीछे दो मुख्य जैविक कारण हैं. पहला यह कि गर्भावस्था के दौरान मां के शरीर से विटामिन के प्लेसेंटा को पार करके बच्चे तक बहुत कम मात्रा में पहुंच पाता है.
दूसरा कारण यह है कि विटामिन के का निर्माण हमारे पेट और आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया करते हैं, लेकिन जन्म के समय नवजात शिशु की आंतें पूरी तरह से साफ और जीवाणुहीन होती हैं. इसके अलावा, मां के दूध में भी विटामिन के की मात्रा बहुत कम होती है. यही वजह है कि शुरुआती कुछ हफ्तों तक बच्चे का शरीर खुद से खून का थक्का जमाने के लिए जरूरी विटामिन के नहीं बना पाता.
क्या है VKDB और यह कितनी खतरनाक है?
विटामिन के हमारे शरीर में खून को थक्का जमाने वाले प्रोटीन को एक्टिव करने का काम करता है. जब शरीर में इसकी कमी होती है, तो खून का बहना बंद नहीं होता. नवजात बच्चों में इसकी कमी से होने वाली ब्लीडिंग को मुख्य रूप से तीन चरणों में देखा जाता है- अर्ली, क्लासिक, और लेट . सबसे खतरनाक लेट वीकेडीबी होती है, जिसमें बिना किसी बाहरी चोट के बच्चे के मस्तिष्क के अंदर या आंतों में अचानक ब्लीडिंग शुरू हो जाती है. दिमाग के अंदर खून बहने से बच्चे को गंभीर दिमागी क्षति हो सकती है या उसकी जान भी जा सकती है.
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रिसर्च के आंकड़े और डॉक्टरों की सख्त सलाह
अंतरराष्ट्रीय बाल रोग जर्नल में प्रकाशित हालिया डेटा के मुताबिक, जो माता-पिता प्राकृतिक या घरेलू तरीकों के चक्कर में अपने बच्चे को जन्म के समय विटामिन के का इंजेक्शन लगवाने से इनकार कर देते हैं, उनके बच्चों में लेट वीकेडीबी होने का खतरा इंजेक्शन प्राप्त करने वाले बच्चों की तुलना में 81 गुना अधिक बढ़ जाता है.
डॉक्टरों का कहना है कि यह बीमारी पूरी तरह से रोकी जा सकती है. जन्म के तुरंत बाद शिशु की जांघ की मांसपेशी में विटामिन K1 की 1 मिलीग्राम की एक छोटी सी खुराक दी जाती है. यह खुराक बच्चे के लीवर में सुरक्षित जमा हो जाती है और जब तक बच्चा ठोस आहार खाना शुरू नहीं कर देता, तब तक उसे ब्लीडिंग के हर खतरे से बचा कर रखती है. अस्पताल से डिस्चार्ज होने से पहले माता-पिता को यह जरूर सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि बच्चे को यह ड्रॉप या इंजेक्शन लग चुका हो.
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