त्योहारी सीजन की सुगबुगाहट शुरू होते ही हवाई यात्रा की कीमतें आसमान छूने लगी हैं. दशहरा, दीवाली और छठ पूजा के समय दिल्ली से पटना, दरभंगा, कोलकाता समेत कई प्रमुख रूट्स पर टिकटों की कीमत आम दिनों के मुकाबले काफी ऊपर पहुंच गई है. कुछ रूट्स पर किराया तीन गुना से भी ज्यादा महंगा हो गया है. ऐसे में त्योहारों पर घर लौटने की तैयारी कर रहे मध्यमवर्गीय परिवारों और कामकाजी यात्रियों के बजट को बड़ा झटका दिया है.
दिल्ली से पटना और दरभंगा का टिकट भी महंगा
बिहार जाने वाली उड़ानों में त्योहार के आसपास किराये में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है. जहां आम दिनों में दिल्ली-पटना का किराया करीब 4500 रुपये होता है, वह दुर्गा पूजा के समय कम से कम 6000 रुपये है, जबकि दिवाली के समय करीब आते-आते किराया तीन गुने से भी ज्यादा हो कर 14000 रुपये तक पहुंच रहा है. बात करें, दिल्ली-दरभंगा रूट की तो इस रूट पर टिकटें और भी महंगी हैं. जहां सामान्य किराया करीब 6500 रुपये रहता है, वह किराया दुर्गा पूजा के दौरान 17000 रुपये तक पहुंच गया है. हालांकि, दिवाली के समय इसका किराया फिलहाल दुर्गा पूजा के समय से थोड़ा सस्ता होकर 12000 रुपये बताया जा रहा है. वहीं, दिल्ली-कोलकाता रूट पर सामान्य दिनों में करीब 8000 रुपये तक रहने वाला किराया दुर्गा पूजा में 11000 रुपये तक पहुंच गया है.
त्योहारी सीजन का असर दूसरे बड़े रूट्स पर भी दिख रहा है. दिल्ली-मुंबई रूट पर जहां कुछ समय पहले आने-जाने का किराया करीब 10 हजार रुपये था, वहीं अब यह 18 से 25 हजार रुपये तक बताया जा रहा है. दिल्ली-अहमदाबाद के लिए 10 से 12 हजार रुपये का किराया बढ़कर 18 से 20 हजार रुपये तक पहुंच गया है. दिल्ली-बेंगलुरु रूट पर भी यात्रियों को ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ रही है. पहले करीब 12 से 15 हजार रुपये में होने वाला आने-जाने का सफर अब 30 से 35 हजार रुपये तक पहुंचने का दावा किया गया है. दिल्ली-कोलकाता रूट पर भी किराया करीब 11 हजार रुपये से बढ़कर 20 हजार रुपये तक बताया जा रहा है.
मांग बढ़ने से बदलने लगे टिकट के दाम
त्योहारी सीजन में हवाई टिकट महंगे होने की सबसे बड़ी वजह बढ़ती मांग और सीमित सीटों को माना जा रहा है. त्योहारों के आसपास बड़ी संख्या में लोग अपने घर का रुख करते हैं. ऐसे में जैसे-जैसे फ्लाइट में सीटें कम होती हैं, वैसे ही किराया तेजी से ऊपर जाने लगता है. विमानन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, एयरलाइंस डायनेमिक प्राइसिंग सिस्टम का इस्तेमाल करती हैं. टिकट की सर्च और बुकिंग बढ़ने पर उपलब्ध सीटों की कीमत रियल टाइम में बदल सकती है. यही वजह है कि एक ही फ्लाइट का किराया अलग-अलग समय पर काफी अलग दिखाई दे सकता है.
हवाई किराया बढ़ने के ये हैं कारण
एविएशन डेटा एजेंसी OAG के आंकड़ों के अनुसार सितंबर में घरेलू उड़ानों की क्षमता में 5.6 प्रतिशत की कमी की बात सामने आई है. मिली जानकारी के मुताबिक, इंडिगो की सीट क्षमता 4.5 प्रतिशत और एयर इंडिया की 8.8 प्रतिशत कम हुई है. इसके अलावा जेट फ्यूल की कीमत में 5.46 प्रतिशत बढ़ोतरी भी विमानन कंपनियों की लागत पर असर डाल रही है. एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी एटीएफ एयरलाइंस के परिचालन खर्च का बड़ा हिस्सा होता है. मांग बढ़ने और क्षमता घटने के कारण इसका असर टिकट की कीमतों पर दिखाई दे रहा है.
महंगे टिकट से बचने के लिए ये विकल्प आजमाएं
त्योहारी सीजन में अगर सफर जरूरी है तो यात्री मुख्य त्योहार वाले दिन हवाई यात्रा का विकल्प देखें, उस दिन तुलनात्मक रूप से किराए में कमी आने की संभावना है. इसके अलावा देर रात और सुबह जल्दी चलने वाली उड़ानों से भी यात्रा किफायती साबित हो सकता है. सीधे रूट पर टिकट काफी महंगा मिल रहा हो तो आसपास के दूसरे एयरपोर्ट से सफर का विकल्प भी देखना बेहतर हो सकता है.
बढ़ते किराये पर CTI ने सरकार से हस्तक्षेप मांगा
वहीं, आसमान छूते हवाई किराये को लेकर चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने सरकार को पत्र लिखकर सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है. CTI चेयरमैन बृजेश गोयल का कहना है कि कुछ रूट्स पर पिछले कुछ दिनों में किराये में 50 से 100 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है. CTI ने दिल्ली से क़ई प्रमुख रूट्स पर बढ़े किराये का मुद्दा उठाया है. संगठन ने यह भी कहा है कि इंडिगो ने 3 दिन से 2 साल तक के शिशुओं का शुल्क 2000 से बढ़ाकर 3000 रुपये कर दिया है, जबकि शिशु के लिए अलग सीट नहीं होती.
CTI ने केंद्र सरकार से विमान कंपनियों के किराये पर यथाशीघ्र हस्तक्षेप करने की मांग की है. संगठन का कहना है कि त्योहारी सीजन में हवाई यात्रा की बढ़ती जरूरत को देखते हुए किराये में अचानक हुई बढ़ोतरी पर नियंत्रण जरूरी है. CTI ने सरकार से विमान कंपनियों पर नकेल कसने और हवाई किराये में कटौती कराने की मांग की है.
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