किर्गिस्तान में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों की मुश्किलें बढ़ सकती है. देश में मेडिकल यूनिवर्सिटी और कॉलेज के लिए शुरू की गई नई स्टेट एक्रिडिटेशन प्रक्रिया में 13 संस्थान निर्धारित मानको पूरा नहीं कर पाए हैं. भारतीय दूतावास ने जून में जारी एडवाइजरी में इन संस्थानों की स्थिति को लेकर छात्रों को जानकारी दी थी. अब इन यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे भारतीय छात्रों के सामने बड़ा सवाल यह है कि अगर उन्हें किसी दूसरे मान्यता प्राप्त संस्थान में ट्रांसफर किया जाता है, तो उनकी पढ़ाई, क्रेडिट और भारत में मेडिकल रजिस्ट्रेशन की पात्रता का क्या होगा.
दरअसल किर्गिस्तान सरकार ने सभी मेडिकल यूनिवर्सिटी और कॉलेज के लिए स्टेट एक्रिडिटेशन जरूरी किया है. इसके लिए प्रक्रिया पूरी करने की समय सीमा 1 जून 2026 रखी गई थी. जिन संस्थानों को यह मान्यता नहीं मिलती वह नए छात्रों को एडमिशन नहीं दे सकते और राज्य मानक के एजुकेशन डॉक्यूमेंट भी जारी नहीं कर सकते. वहीं जरूरी मानकों को पूरा न करने पर संस्थान का शैक्षणिक लाइसेंस भी निलंबित किया जा सकता है.
किन 13 मेडिकल संस्थानों को नहीं मिली मान्यता?
भारतीय दूतावास की एडवाइजरी में जिन 13 मेडिकल संस्थानों का जिक्र किया गया है, उनमें एविसेना इंटरनेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी, ADAM यूनिवर्सिटी, रॉयल मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी, अल्तामिमी इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, अला-टू इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, इंटरनेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी, किर्गिज मेडिकल एंड डेंटल इंस्टीट्यूट, सालिमबेकोव यूनिवर्सिटी, यूरेशियन इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, बिश्केक इंटरनेशनल मेडिकल इंस्टीट्यूट, इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिसिन एंड साइंस, सेंट्रल एशियन इंटरनेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी और ओश इंटरनेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी शामिल है. यह प्रक्रिया मेडिकल संस्थानों में फैकल्टी और स्टाफ क्लीनिंग सुविधाओं, तकनीकी संसाधनों, शैक्षणिक कार्यक्रमों और पढ़ाई की व्यवस्था जैसे मानको की जांच के लिए की गई थी.
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छात्रों के लिए बनाई गई ट्रांसफर की व्यवस्था
गैर-मान्यता प्राप्त मेडिकल संस्थानों में पहले से पढ़ रहे छात्रों को लेकर किर्गिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने 3 अगस्त को ट्रांसफर प्रक्रिया जारी की. इसके तहत प्रभावित छात्रों को मान्यता प्राप्त मेडिकल संस्थानों में भेजने और इसके लिए रिसीविंग यूनिवर्सिटी की पहचान करने की व्यवस्था की गई. भारतीय दूतावास ने भी एडवाइजरी में बताया था कि गैर-मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी के छात्रों की सुरक्षा के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय दूसरे मान्यता प्राप्त मेडिकल यूनिवर्सिटी में ट्रांसफर की व्यवस्था कर रहा है. हालांकि भारतीय छात्रों के लिए अभी भी कई सवाल साफ नहीं है, जैसे ट्रांसफर के बाद पहले से पूरी की गई पढ़ाई और क्लीनिकल ट्रेनिंग को किस तरह माना जाएगा. पुराने क्रेडिट कैसे एडजस्ट होंगे और नए संस्थान में पढ़ाई पूरी करने के बाद डिग्री भारत में मान्य होगी या नहीं इसे लेकर स्पष्ट की मांग की जा रही है.
भारत में मेडिकल रजिस्ट्रेशन पर सवाल
यह मामला इसलिए भी जरूरी है क्योंकि भारत में विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन के नियम लागू होते हैं. फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट लाइसेंस रेगुलेशन के तहत मेडिकल शिक्षा ट्रेनिंग और इंटर्नशिप को निर्धारित शर्तों के अनुसार पूरा करना जरूरी है. नियमों के अनुसार पूरे कोर्स, ट्रेनिंग और इंटर्नशिप को एक ही विदेशी मेडिकल संस्थान से पूरे करने की शर्तें भी जरूरी है. इसी वजह से ट्रांसफर के बाद पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों के लिए भारत में रजिस्ट्रेशन को लेकर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है. हालांकि भारतीय दूतावास ने छात्रों को सलाह दी है कि वह अपनी यूनिवर्सिटी और कोर्स की स्थिति को एनएमसी के नियमों के अनुसार जांचे.
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