Explained: 2 अक्टूबर को बंद नहीं होगा UPI, विरोध पर दूर करें सारा कंफ्यूजन

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  • सरकार ने 300 MDR कैप, छोटे व्यापारी बरी.

अगर आप भी इस कंफ्यूजन में हैं कि 2 अक्टूबर को UPI काम करेगा या नहीं, तो बता दें कि 2 अक्टूबर को देशभर में UPI सिस्टम बंद नहीं होगा. सोशल मीडिया पर ‘No UPI Day’ को लेकर जो खबरें फैलाई जा रही हैं, उनमें कोई सच्चाई नहीं है. ऐसा हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि यह कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स यानी CAIT का कहना है. राष्ट्रीय व्यापारी संगठन ने यह साफ कह दिया है कि उनकी तरफ से ऐसा कोई ऐलान नहीं किया गया है.

CAIT ने कर दिया सब कुछ क्लियर

CAIT ने यह भी कहा है कि UPI पर MDR चार्ज का विरोध कुछ स्थानीय व्यापारिक संगठन व्यक्तिगत रूप से कर सकते हैं. इनका CAIT से कोई लेना-देना नहीं है. राष्ट्रीय व्यापारी संगठन ने मीडिया से अपील की कि CAIT के नाम से कोई भी खबर दिखाए या पब्लिश किए जाने से पहले CAIT के ऑफिशियल सोर्सेज से कन्फर्म जरूर कर लें. साथ ही जनता व कारोबारियों से भी इस बात की अपील की गई कि अटकलों पर भरोसा करने के बजाय CAIT की आधिकारिक सूचनाओं पर ही ध्यान दें. 

CAIT ने कहा कि वह भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की ग्रोथ, सस्टेनेबिलिटी और सिक्योरिटी को सपोर्ट करते हुए व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. हालांकि, न्यूज एजेंसी PTI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बीते बुधवार को मध्य प्रदेश भर के व्यापारियों ने 2000 से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% फीस लगाने के केंद्र सरकार के विरोध में ‘नो UPI डे’ मनाया. इस दौरान उन्होंने अपनी दुकान पर लगे QR कोड को काले कपड़े से ढक दिया. 

UPI MDR पर क्यों मचा है शोर? 

सरकार ने 15 अक्टूबर 2026 से कारोबारियों के लिए 2,000 से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने का प्रस्ताव रखा है. पर्सन-टू-पर्सन’ ट्रांजैक्क्शन और 2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट को इसके दायरे से बाहर रखा गया है. यानी कि आम यूजर्स के लिए पर्सन-टू-पर्सन (P2P) यानी कि एक फोन से दूसरे फोन में पैसे ट्रांसफर करना और छोटे पेमेंट्स हमेशा की तरह पूरी तरह से फ्री रहेंगे. इन पर कोई चार्ज नहीं लगेगा.

देश भर के कारोबारियों को इसी बात से ऐतराज है. ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA) जैसे संगठनों का कहना है कि इससे छोटे दुकानदारों के मुनाफे पर असर पड़ेगा और उन पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा. 

व्यापारियों को क्यों है ऐतराज?

15 अक्टूबर से लागू होने वाले नियमों के तहत 2,000 से ऊपर के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR चार्ज लगेगा. कारोबारियों का कहना है कि उनका मुनाफा पहले ही सीमित है. ऐसे में अगर 2,000 से ऊपर के हर ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR चुकाना पड़े, तो इससे उन पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा. मिसाल के तौर पर, अगर कोई ग्राहक 10,000 रुपये से अधिक का कोई सामान खरीदता है और उसका पेमेंट UPI के जरिए करता है, तो दुकानदार के खाते से अपने आप 40 रुपये कट जाएंगे.

त्योहारी सीजन से पहले यह बड़ा झटका है. रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (RAI) और क्लोथिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन का कहना है यह चार्ज एक ऐसे समय में लगाया जा रहा है, जब सामने दशहरा-दीवारी जैसे त्योहार हैं. इस वक्त इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर कपड़े, ज्वेलरी की बड़ी खरीदारी होती है और अमूमन ट्रांजैक्शन वैल्यू 2,000 के ऊपर ही होती है. ऐसे में 0.4% MDR चार्ज के इस नियम का उनके मुनाफे पर काफी असर पड़ेगा. 

सरकार ने भी रखी बात 

UPI MDR को लेकर देश भर में हो रहे इस भारी विरोध प्रदर्शनों के बीच  वित्त मंत्रालय और NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) ने इस पर अपना पक्ष रखा है. उनका कहना है कि इस नियम का असर सिर्फ और सिर्फ बड़े कारोबारियों पर पड़ेगा.

जिन दुकानदारों की UPI से महीने की कमाई 1 लाख से कम है उन्हें इस MDR चार्ज से पूरी तरह से बाहर रखा गया है. साथ ही नए UPI नियमों के तहत बड़े ट्रांजैक्शंस पर लगने वाले चार्ज की अधिकतम सीमा भी  300 रुपये तक ही तय की गई है.

15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले इस नियम के तहत कारोबारियों पर लगने वाले 0.4% MDR चार्ज पर 300 का कैप लगाया गया है. यानी कि 75,000 रुपये और उससे अधिक के ट्रांजैक्शंस पर यह चार्ज अधिकतम 300 रुपये तक ही बैठेगा. 75,000 का 0.4% 300 रुपये होता है.

अगर कोई ग्राहक किसी सामान के बदले किसी बड़े कारोबारी को UPI के जरिए 1 लाख, 2 लाख या 5 लाख रुपये का पेमेंट करता है, तो भी दुकानदार के खाते से सिर्फ 300 रुपये ही कटेंगे. उससे ज्यादा एक रुपया नहीं कटेगा. म्यूचुअल फंड, शेयर मार्केट ब्रोकर या सिक्योरिटीज से जुड़े ट्रांजैक्शन पर भले ही MDR दर सिर्फ 0.02% है, लेकिन वहां भी इसकी लिमिट 300 रुपये तक ही सीमित रखी गई है.

क्या होता है MDR?

मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को आप डिजिटल पेमेंट की दुनिया का टोल टैक्स समझ सकते हैं. जब आप दुकान पर जाकर कैश की जगह कार्ड या मोबाइल से पेमेंट करते हैं, तो उस पैसे को आपके बैंक अकाउंट से निकालकर दुकानदार या मर्चेंट के बैंक अकाउंट तक सुरक्षित पहुंचाने के पीछे एक बड़ा नेटवर्क काम करता है, जिसमें बैंक, यूपीआई ऐप्स, वीजा या मास्टरकार्ड या वीजा कंपनियां शामिल होती हैं.

यह एक मशीनरी है, जिसे चौबीसों घंटे चालू और सुरक्षित रखने के लिए इसके इंफ्रास्ट्रक्चर पर जो खर्च आता है, उसे ही MDR कहा जाता है. हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि UPI पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का एक भी पैसा सरकारी खजाने में नहीं जाएगा. सरकार ने विपक्ष और आम जनता के कंफ्यूजन को दूर करते हुए कहा कि यह कोई सरकारी टैक्स, सेस (Cess) या सरचार्ज नहीं है.

UPI MDR पर सुप्रीम कोर्ट की राय

सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई में 2,000 से अधिक के UPI पेमेंट पर 0.4% MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) लगाए जाने पर नोटिस जारी किया है. चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने केंद्र सरकार, रिजर्व बैंक और NPCI से 4 सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है. सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने सरकार से पूछा कि अगर यह टैक्स नहीं है, तो फिर यह क्या है?” 

हालांकि, जजों ने 15 अक्टूबर से लागू हो रही इस व्यवस्था पर रोक लगाने से मना कर दिया. इसका मतलब यह है कि यह नया नियम अपनी तय तारीख 15 अक्टूबर 2026 से ही लागू होने जा रहा है. 

याचिकाकर्ता अंजन दत्ता ने 14 और 15 सितंबर 2026 को जारी वित्त मंत्रालय की अधिसूचनाओं को चुनौती दी है. उनका कहना है कि इस व्यवस्था को लाते समय न तो किसी जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया और न ही चर्चा की गई. इससे छोटे व्यापारियों पर बोझ पड़ेगा. इस जनहित याचिका (PIL) पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की 3 जजों की पीठ ने सुनवाई की.

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