जब छोटा बच्चा लगातार रोता है तो माता-पिता उसे चुप कराने के लिए कई तरीके अपनाते हैं. कोई उसे गोद में लेकर झुलाता है तो कोई लोरी सुनाता है. इसी बीच सोशल मीडिया पर सारा जेन हो नाम की एक महिला ने अपने 4 महीने के बच्चे को लेकर एक अलग अनुभव बताया.
उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि जब उनका बच्चा चिड़चिड़ा होकर रोने लगता है तो वह हनुमान चालीसा बजाती हैं और उनके मुताबिक बच्चा कुछ ही सेकेंड में शांत हो जाता है और थोड़ी देर में सो जाता है. सारा ने यह भी बताया कि उन्हें हनुमान चालीसा के बारे में अपने भारतीय दोस्तों से पता चला था. हालांकि यह उनका निजी अनुभव है, लेकिन इससे हनुमान चालीसा को लेकर एक बार फिर लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है. आखिर इसे सुनने से मन और शरीर पर किस तरह का असर महसूस हो सकता है, आइए जानते हैं.
हनुमान चालीसा सुनकर बच्चे के शांत होने का क्या है कारण?
सारा जेन हो के अनुभव में उनके बच्चे को हनुमान चालीसा सुनाने के बाद जल्दी शांति मिलती है. इसके पीछे सिर्फ धार्मिक पाठ होना ही वजह है, ऐसा वैज्ञानिक रूप से नहीं कहा जा सकता. लेकिन हनुमान चालीसा में लगातार चलने वाली लय और दोहराव वाली आवाज होती है, जो बच्चे का ध्यान रोने या बेचैनी से हटाकर आवाज की तरफ ले जा सकती है. बच्चों को शांत करने के लिए विशेषज्ञ भी धीमा संगीत, गाना, बोलना और लय वाली हल्की आवाजें आजमाने की सलाह देते हैं.
धीमी और एक जैसी लय बच्चे को क्यों शांत करती है?
छोटे बच्चों का दिमाग लगातार नई आवाजों और चीजों पर प्रतिक्रिया करता है. जब उन्हें बहुत तेज या बदलती हुई आवाजों के बजाय एक जैसी और अनुमान लगाने लायक लय सुनाई देती है तो आसपास का माहौल कम उत्तेजित महसूस हो सकता है. रिसर्च में भी पाया गया है कि लोरी जैसी धुनें बच्चों में शांति से जुड़ी प्रतिक्रियाएं पैदा कर सकती हैं. कुछ अध्ययनों में लोरी या मां की आवाज सुनने के दौरान छोटे बच्चों की गतिविधि और दिल की धड़कन में कमी देखी गई है. यही शांत अवस्था बच्चे के सोने की तरफ बढ़ने में मदद कर सकती है.
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परिचित आवाज और गाना बच्चे को ज्यादा सुकून क्यों देते हैं?
बच्चे सिर्फ धुन ही नहीं, बल्कि आवाज के तरीके को भी पहचानना सीखते हैं. अगर कोई आवाज या गाना बार-बार सुनाया जाए तो वह बच्चे के लिए परिचित बन सकता है. एक अध्ययन में 8 और 10 महीने के बच्चों पर देखा गया कि परिचित गाना उन्हें दूसरी आवाजों की तुलना में ज्यादा शांत करने में मदद कर सकता है. यही वजह है कि बच्चे को रोज एक ही तरह की धीमी लोरी, मां की आवाज या कोई शांत पाठ सुनाने से वह आवाज धीरे-धीरे उसके लिए आराम से जुड़ी हो सकती है.
आवाज सुनते-सुनते बच्चे को नींद क्यों आने लगती है?
जब बच्चा रोने या ज्यादा उत्तेजित होने की स्थिति से धीरे-धीरे शांत अवस्था में आता है तो उसकी गतिविधि कम होने लगती है और शरीर आराम की स्थिति में जाने लगता है. अगर इसी समय कमरे में रोशनी कम हो, आसपास शोर न हो और कोई धीमी, लगातार आवाज चल रही हो तो बच्चे को सोने में मदद मिल सकती है. छोटे बच्चों के लिए लोरी या शांत संगीत को उनके बेडटाइम रूटीन का हिस्सा बनाया जा सकता है. लेकिन संगीत या हनुमान चालीसा को नींद की दवा नहीं समझना चाहिए.
क्या हर बच्चे पर हनुमान चालीसा का ऐसा ही असर होगा?
जरूरी नहीं. सारा जेन हो ने जो बताया है वह उनके बच्चे का व्यक्तिगत अनुभव है, इसलिए इसे हर बच्चे के लिए पक्का नतीजा नहीं माना जा सकता. किसी बच्चे को हनुमान चालीसा पसंद आ सकती है, किसी को लोरी या मां की आवाज ज्यादा शांत कर सकती है और किसी बच्चे को बिल्कुल शांत कमरा पसंद आ सकता है. अगर बच्चा लगातार और असामान्य तरीके से रो रहा है तो सिर्फ कोई आवाज चलाकर उसे शांत करने की कोशिश करने के बजाय उसकी दूसरी जरूरतों पर भी ध्यान देना चाहिए.
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