हड्डियां हमारे शरीर को सहारा देने के साथ चलने-फिरने और रोजमर्रा के काम करने में मदद करती हैं. हड्डियों की मजबूती का एक अहम पैमाना बोन डेंसिटी यानी हड्डियों में मौजूद मिनरल की मात्रा होती है. इसमें मुख्य रूप से कैल्शियम और फॉस्फोरस शामिल होते हैं. उम्र बढ़ने, खराब खानपान, कम फिजिकल एक्टिविटी और कुछ स्वास्थ्य स्थितियों के कारण बोन डेंसिटी कम हो सकती है. शुरुआत में इसका पता लगाना आसान नहीं होता, इसलिए हड्डियों की सेहत का ध्यान रखना जरूरी है.
क्या होती है बोन डेंसिटी?
बोन डेंसिटी का मतलब हड्डियों में मौजूद मिनरल की मात्रा से है. जब हड्डियों की डेंसिटी अच्छी होती है तो वे मजबूत रहती हैं. वहीं डेंसिटी कम होने पर हड्डियां कमजोर और टूटने की संभावना वाली हो जाती हैं. बोन डेंसिटी कम होने की स्थिति को अलग-अलग स्तरों पर समझा जाता है. ऑस्टियोपीनिया में हड्डियों की डेंसिटी सामान्य से कम होती है, जबकि ऑस्टियोपोरोसिस में यह कमी ज्यादा होती है और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है. उम्र बढ़ने के साथ बोन डेंसिटी में प्राकृतिक कमी आना सामान्य प्रक्रिया है. खासकर महिलाओं में मेनोपॉज के बाद हार्मोनल चेंजेस के कारण हड्डियों की कमजोरी का खतरा बढ़ सकता है. इसके अलावा शरीर में कैल्शियम और विटामिन डी की कमी भी बोन हेल्थ को प्रभावित करती है.
किन लोगों में बढ़ता है हड्डियां कमजोर होने का खतरा?
आगरा स्थित ओम नर्सिंग होम में डॉ. पीके गुप्ता के मुताबिक, हर व्यक्ति में हड्डियों की कमजोरी का कारण एक जैसा नहीं होता. बढ़ती उम्र इसका एक प्रमुख कारण है. इसके अलावा लंबे समय तक फिजिकल एक्टिविटी कम रहने से भी हड्डियों पर असर पड़ता है. जो लोग पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन डी नहीं लेते, उनमें भी बोन हेल्थ प्रभावित हो सकती है. स्मोकिंग और ज्यादा अल्कोहल का सेवन भी हड्डियों के लिए नुकसानदायक माना जाता है. कम बॉडी वेट, फैमिली हिस्ट्री और कुछ स्वास्थ्य समस्याएं भी रिस्क फैक्टर्स में शामिल हैं. कुछ दवाओं का लंबे समय तक इस्तेमाल भी हड्डियों की डेंसिटी को प्रभावित कर सकता है. इसलिए अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से किसी दवा का इस्तेमाल कर रहा है तो उसे डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही इसे लेना चाहिए.
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हड्डियों को मजबूत रखने के लिए क्या करें?
बोन हेल्थ को बेहतर रखने के लिए डाइट में कैल्शियम और विटामिन डी वाले फूड्स शामिल करना जरूरी है. दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स, कुछ हरी सब्जियां और अन्य कैल्शियम-रिच फूड्स डाइट का हिस्सा बनाए जा सकते हैं. विटामिन डी के लिए धूप और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लिया जाता है. इसके साथ वॉकिंग, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और दूसरे वेट-बेयरिंग एक्सरसाइज भी हड्डियों के लिए उपयोगी होते हैं. नियमित फिजिकल एक्टिविटी शरीर को एक्टिव रखने के साथ हड्डियों की मजबूती बनाए रखने में मदद करती है. अगर कमर या पीठ में लगातार दर्द रहता है, समय के साथ हाइट कम होती दिखाई देती है या मामूली चोट में बार-बार फ्रैक्चर होता है तो डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए. बोन डेंसिटी की जांच से हड्डियों की स्थिति का पता लगाने में मदद मिलती है.
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