बिहार में पिछले दो दशकों में उच्च शिक्षा का तेजी से विस्तार हुआ है. यूनिवर्सिटी और कॉलेज की संख्या लगातार बढ़ी है, लेकिन नई संस्थाएं देश के हर हिस्से में एक समान नहीं पहुंची है. द ज्योग्राफी ऑफ हायर एजुकेशन रिपोर्ट 2026 के अनुसार आने वाले वर्षों में जिन राज्यों में छात्रों की संख्या ज्यादा रहने वाली है, वहां उच्च शिक्षा की क्षमता उतनी नहीं है. इसका सबसे बड़ा दबाव बिहार में दिखाई दे रहा है, जहां मौजूदा क्षमता के हिसाब से एक यूनिवर्सिटी पर करीब 10.3 लाख छात्रों का बोझ पड़ सकता है. यह रिपोर्ट शिक्षा सलाहकार संस्था जेत्री और डेटा प्लेटफाॅर्म Impactica.org की ओर से जारी की गई है. रिपोर्ट में देश में हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट के भौगोलिक वितरण और आने वाली छात्र आबादी के बीच संबंध का अध्ययन किया गया है. इसमें बिहार के साथ उत्तर प्रदेश और झारखंड को भी सबसे बड़े क्षमता अंतर वाले राज्यों में शामिल किया गया है.
रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2026 तक देश में 1405 यूनिवर्सिटी और 53,433 कॉलेज मौजूद थे. 2001 में इनमें बड़ी संख्या में संस्थाओं की स्थापना हुई. करीब 70 प्रतिशत यूनिवर्सिटी और 65 प्रतिशत कॉलेज 2001 के बाद स्थापित किए गए. 18 से 23 वर्ष की आबादी के प्रति 1 लाख लोगों पर कॉलेज की संख्या भी 2001 में 9 से बढ़कर 2026 में 37 हो गई. हालांकि इस अवधि में इस आयु वर्ग की आबादी में करीब 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई. रिपोर्ट का कहना है कि छात्रों की संख्या बढ़ने के बावजूद उनकी लोकेशन और युवा आबादी के बीच संतुलन नहीं बन पाया है.
बिहार में सबसे ज्यादा अंतर
रिपोर्ट में बिहार को उच्च शिक्षा के लिहाज से सबसे ज्यादा दबाव वाले राज्यों में रखा गया है. यहां 18 से 23 वर्ष की आबादी पर प्रति लाख केवल 0.2 यूनिवर्सिटी और 9 कॉलेज है. मौजूदा क्षमता में बदलाव नहीं होने पर बिहार में एक यूनिवर्सिटी को वर्तमान में 3 से 17 वर्ष की उम्र वाले करीब 10.3 लाख बच्चों की भविष्य की उच्च शिक्षा की जरूरत पूरी करनी पड़ सकती है. वहीं उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा करीब 6 लाख बताया गया है. बिहार में करीब 1200 से ज्यादा कॉलेज है, लेकिन बड़ी संख्या में युवा आबादी के मुकाबले कॉलेज का घनत्व काफी कम है. रिपोर्ट के अनुसार बिहार में हायर एजुकेशन का सकल नामांकन अनुपात भी कम है. 2023 24 में बिहार का GER 17.66 प्रतिशत था, जबकि झारखंड में 19.43 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में 25.97 प्रतिशत था. राष्ट्रीय स्तर पर GER करीब 30 प्रतिशत था.
यूपी और झारखंड में भी बढ़ सकता है दबाव
उत्तर प्रदेश में संस्थानों की संख्या बिहार की तुलना में बहुत ज्यादा है. AISHE 2022-23 के अनुसार यूपी में 8,310 कॉलेज और 91 यूनिवर्सिटी थी, जबकि बिहार में 1,175 कॉलेज और 37 यूनिवर्सिटी और झारखंड में 425 कॉलेज और 34 यूनिवर्सिटी थी. इसके बावजूद यूपी की बड़ी आबादी और युवा वर्ग के कारण प्रति लाख 18-23 आयु वर्ग पर कॉलेज की उपलब्धता करीब 35 है. यूनिवर्सिटी का घनत्व करीब 0.4 लाख प्रति लाख है. झारखंड में यह 10 कॉलेज और 0.8 यूनिवर्सिटी प्रति लाख है. रिपोर्ट में इन राज्यों के साथ पश्चिम बंगाल को भी ऐसे राज्यों में रखा गया है, जहां युवा आबादी के मुकाबले उच्च शिक्षा संस्थानों की उपलब्धता कम है.
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इन राज्यों में ज्यादा है कॉलेज का घनत्व
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि उच्च शिक्षा संस्थानों का वितरण राज्यों के बीच काफी अलग है. कर्नाटक में करीब 79 कॉलेज प्रति लाख 18-23 वर्ष की आबादी है. वहीं तेलंगाना में यह आंकड़ा 63, आंध्र प्रदेश में 58, केरल में 54, राजस्थान में 51 और महाराष्ट्र में 48 है. इससे साफ होता है कि सिर्फ किसी राज्य में कुल कितने कॉलेज या यूनिवर्सिटी है, यह देखना पर्याप्त नहीं है. आबादी के अनुपात में संस्थानों की उपलब्धता भी जरूरी है.
भविष्य के छात्रों को देखते हुए क्षमता बढ़ाने पर जोर
रिपोर्ट में बताया गया है कि देश की 3 से 17 वर्ष की आबादी का बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में है. इनमें मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र ने युवा आबादी के साथ उच्च शिक्षा क्षमता भी बढ़ाई है, जबकि यूपी, बिहार और झारखंड में यह अंतर ज्यादा दिखाई देता है. रिपोर्ट के अनुसार देश की 28 प्रतिशत यूनिवर्सिटीज सिर्फ 20 जिलों में केंद्रित है. वहीं शिक्षा से जुड़े 83 प्रतिशत प्रवासी अपने ही राज्य के अंदर रहते हैं. ऐसे में भविष्य की आबादी के आसपास उच्च शिक्षा संस्थानों की उपलब्धता बढ़ाना जरूरी होगा.
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