बोर्ड में बेहतर परिणाम के लिए यूपी सरकार का दांव! लिया बड़ा फैसला

ee9ee17d55cacd3593f1f0f193c6178a17908298622931473 original


उत्तर प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा परिषद की बोर्ड परीक्षाओं में छात्रों के प्रदर्शन को सुधारने के लिए योगी सरकार ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने राज्य के सरकारी और सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों में कमजोर छात्रों के लिए विशेष उपचारात्मक कक्षाएं यानी एक्स्ट्रा क्लासेस चलाने की पुख्ता व्यवस्था की है. इस नए कदम का सीधा उद्देश्य बोर्ड परीक्षा के नतीजों को बेहतर बनाना और उन छात्रों की मदद करना है जो पढ़ाई में थोड़े पीछे छूट जाते हैं. सरकार का मानना है कि इस फैसले से न सिर्फ बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि राज्य में शिक्षा का स्तर भी ऊंचा होगा.

यह फैसला खास तौर पर कक्षा 9वीं से 12वीं तक के उन छात्र-छात्राओं को ध्यान में रखकर लिया गया है, जिनका प्रदर्शन त्रैमासिक या अर्धवार्षिक परीक्षाओं में उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है. अब इन छात्रों को स्कूल के नियमित समय के बाद या खाली पीरियड्स में विशेष गाइडेंस दी जाएगी. सरकार ने साफ किया है कि इन एक्स्ट्रा क्लासेस में छात्रों को केवल पढ़ाया ही नहीं जाएगा, बल्कि उनकी रोज की प्रगति पर भी नजर रखी जाएगी.

12वीं के छात्रों के लिए पहली बार आया बड़ा विकल्प

एक्स्ट्रा क्लासेस के अलावा यूपी सरकार और बोर्ड ने कई अन्य ऐतिहासिक फैसले भी किए हैं. यूपी बोर्ड के इतिहास में पहली बार कक्षा 12वीं के छात्रों को इंप्रूवमेंट परीक्षा देने का मौका दिया जा रहा है. इससे पहले तक केवल हाईस्कूल के छात्रों या फिर फेल होने वाले छात्रों के लिए ही कंपार्टमेंट का विकल्प होता था. लेकिन अब अगर कोई छात्र परीक्षा पास कर लेता है और फिर भी अपने किसी विषय के नंबरों से संतुष्ट नहीं है, तो वह दोबारा परीक्षा देकर अपना स्कोर सुधार सकता है. यह फैसला उन मेधावी छात्रों के लिए वरदान साबित होगा जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और जिन्हें बोर्ड में अच्छे प्रतिशत की जरूरत होती है.

परीक्षा पैटर्न में बदलाव

बोर्ड परीक्षाओं को अधिक व्यावहारिक और स्कोरिंग बनाने के लिए परीक्षा पैटर्न में भी बड़ा बदलाव किया गया है. अब कक्षा 11वीं और 12वीं के सभी थ्योरी पेपर 80 अंकों के होंगे. बाकी बचे 20 अंक आंतरिक मूल्यांकन यानी स्कूल के स्तर पर होने वाले टेस्ट और प्रोजेक्ट वर्क के आधार पर दिए जाएंगे. यह नियम हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत जैसे उन विषयों पर भी लागू किया गया है जिनमें पहले कोई प्रैक्टिकल नहीं होता था। इस नए फॉर्मूले से छात्रों के कुल प्रतिशत में काफी सुधार आने की उम्मीद है.

यह भी पढ़ें: मंदिर, तलवार और हथियार! NCERT नई किताबों में आपके बच्चों को क्या पढ़ाना चाहता है?

महंगी किताबों पर रोक और स्मार्ट स्कूल पर फोकस

अभिभावकों को आर्थिक राहत देने और सभी बच्चों को एक समान शिक्षा देने के लिए सरकार ने प्राइवेट पब्लिशर्स की मनमानी पर पूरी तरह रोक लगा दी है. अब स्कूलों में केवल 7-अंकीय सीरियल नंबर वाली अधिकृत NCERT और स्वीकृत सरकारी किताबें ही पढ़ाई जा सकेंगी. कोई भी स्कूल बच्चों को निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर पाएगा.

यह भी पढ़ें: मेडिकल छात्रों के लिए बड़ी खबर, NEET PG की सीटें बढ़कर 58000 के करीब

Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *