
अगर आपका टारगेट कमर्शियल पायलट बनना है, तो 11वीं और 12वीं में फिजिक्स और मैथमेटिक्स पढ़ना जरूरी है. 12वीं के बाद डीजीसीए की निर्धारित योग्यता पूरी करके सीपीएल ट्रेनिंग ली जा सकती है.

पायलट बनने के लिए आपको सबसे पहले ईजीसीए पोर्टल पर कंप्यूटर नंबर के लिए आवेदन किया जाता है. इसके बाद क्लास 2 और क्लास 1 मेडिकल एग्जामिनेशन पूरा करना होता है. उम्मीदवार को डीजीसीए के लिए जरूरी थ्योरी एग्जाम और आरटीआर (ए) पास करने के बाद डीजीसीए से मान्यता प्राप्त फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशन से फ्लाइंग ट्रेनिंग लेनी होती है.

वहीं सीपीएल के लिए न्यूनतम उम्र 17 साल बताई जाती है और 12वीं में फिजिक्स और मैथमेटिक्स होना जरूरी है. इसलिए अगर कोई भी छात्र अभी 10वीं में है और पायलट बनने का टारगेट रखता है, तो उसे 11वीं से ही फिजिक्स और मैथ्स पर ध्यान देना होगा. वहीं एविएशन में हर करियर के लिए साइंस स्ट्रीम जरूरी नहीं है. कॉमर्स और आर्ट्स से पढ़ाई करने वाले छात्र भी एविएशन मैनेजमेंट, एयरपोर्ट ऑपरेशन, एविएशन हॉस्पिटैलिटी और केबिन क्रू जैसे क्षेत्र में जा सकते हैं

जो छात्र बाद में पायलट बनने का फैसला करते हैं और 12वीं में फिजिक्स और मैथमेटिक्स नहीं पढ़ पाए थे. एनआईओएस से इन दोनों सब्जेक्ट को अलग से पूरा कर सकते हैं. इसके बाद जरूरी शैक्षणिक उपयोगिता पूरी होने के बाद पायलट के ट्रेनिंग के रास्ते पर आगे बढ़ा जा सकता है.

डीजीसीए की परीक्षा पास करने के बाद छात्र को प्रैक्टिकल फ्लाइंग ट्रेनिंग दी जाती है. इसमें सीपीएल के लिए निर्धारित फ्लाइंग एक्सपीरियंस पूरा करना होता है. ट्रेनिंग के दौरान छात्र एयरक्राफ्ट हैंडलिंग, नेविगेशन, इमरजेंसी प्रोसिजर्स और दूसरे ऑपरेशनल स्किल्स सीखता है. वहीं पायलट बनने के लिए सिर्फ ट्रेनिंग पूरी कर लेना ही पर्याप्त नहीं है. जरूरी एग्जामिनेशन, फ्लाइंग रिक्वायरमेंट्स और स्किल टेस्ट पूरे करने के बाद उम्मीदवार कमर्शियल पायलट लाइसेंस के लिए आगे बढ़ता है.

कमर्शियल लाइसेंस मिलने के बाद छात्र सीधे एयरलाइन कैप्टन नहीं बनता है. आमतौर पर शुरुआत जूनियर पोस्ट ऑफिसर के तौर पर होती है. इसमें हर एयरलाइन की अपनी रिक्वायरमेंट और ट्रेनिंग प्रक्रिया होती है. एयरलाइन में चुने जाने के बाद एयरक्राफ्ट टाइप के हिसाब से आगे की ट्रेनिंग और जरूरी चेक्स पूरे करने होते हैं. इसके बाद पायलट एयरलाइन में फर्स्ट ऑफिसर के रूप में उड़ान शुरू करता है. वही एक्सपीरियंस और फ्लाइंग हावर्स बढ़ने के साथ सीनियर फर्स्ट ऑफिसर और फिर कैप्टन तक पहुंचने का रास्ता बनता है.

वहीं पायलट की कमाई भी एक समान नहीं होती है. यह एयरलाइन, एयरक्राफ्ट, रैंक, फ्लाइंग हावर्स और अलाउंस पर निर्भर करती है. कई एयरलाइंस में जूनियर फर्स्ट ऑफिसर को 1 लाख से 1.5 लाख रुपये प्रति माह तक सैलरी मिलती है. वहीं फर्स्ट ऑफिसर के स्तर पर यह करीब 2 लाख रुपये तक हो जाती है, इसके बाद प्रमोशन के साथ पायलट की सैलरी भी बढ़ती है.

पायलट ट्रेनिंग एक महंगे करियर ऑप्शन के तौर पर भी जाना जाता है. दरअसल भारत में सीपीएल ट्रेनिंग के लिए करीब 25 से 35 लाख खर्च आता है. हालांकि ट्रेनिंग, फ्लाइंग हावर्स, इंस्टीट्यूट और आगे की एयरलाइन ट्रेनिंग को मिलकर खर्चा अलग-अलग होता है. इसलिए एडमिशन लेने से पहले इंस्टीट्यूट की फीस, स्ट्रक्चर और ट्रेनिंग में शामिल सुविधाओं को समझना भी जरूरी होता है.
Published at : 03 Oct 2026 07:19 AM (IST)
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