पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बावजूद भारत की वित्तीय व्यवस्था फिलहाल मजबूत स्थिति में है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि फ्यूचर में किसी तरह का कोई खतरा नहीं आएगा. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वित्तीय स्थिरता को लेकर अलर्ट रहने की जरूरत बताई है. उन्होंने कहा कि आज की मजबूत वित्तीय स्थिति यह गारंटी नहीं देती कि फ्यूचर में कोई खतरा नहीं आएगा. लंबे समय तक आर्थिक स्थिति स्थिर रहने पर लोग और संस्थान ज्यादा जोखिम लेने लग सकते हैं और कर्ज भी बढ़ सकता है.
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में कहा कि अगला वित्तीय संकट जरूरी नहीं है कि किसी बैंक या वित्तीय संस्था से ही शुरू हो. बदलते समय में साइबर अटैक, भू-राजनीतिक घटनाएं और तकनीकी गड़बड़ियां भी वित्तीय संकट का कारण बन सकती हैं. ऐसे में इसका असर वित्तीय व्यवस्था के अलग-अलग हिस्सों पर भी पड़ सकता है.
मजबूत वित्तीय व्यवस्था के बावजूद क्यों बढ़ सकता है खतरा?
RBI गवर्नर के मुताबिक, भू-राजनीतिक घटनाएं, साइबर अटैक और दूसरे देश के असर जैसे कई वजहों के कारण वित्तीय संकट का खतरा बढ़ सकता है.
- भू-राजनीतिक घटनाएं: दुनिया में होने वाली बड़ी घटनाओं से वित्तीय बाजारों पर दबाव बढ़ सकता है.
- साइबर अटैक: साइबर हमले से बैंकिंग और ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम प्रभावित हो सकता है.
- तकनीकी गड़बड़ी: किसी बड़ी तकनीकी समस्या का असर बैंक, वित्तीय संस्थानों और बाजारों पर पड़ सकता है.
- दूसरे देशों का असर: एक देश में शुरू हुआ वित्तीय संकट दूसरे देशों तक भी पहुंच सकता है.
- ज्यादा कर्ज और जोखिम: लंबे समय तक स्थिरता रहने पर लोग और संस्थान ज्यादा जोखिम ले सकते हैं और कर्ज बढ़ सकते हैं.
बैंकों के अलावा इन क्षेत्रों पर भी नजर जरूरी
RBI गवर्नर का कहना है कि वित्तीय स्थिरता सिर्फ बैंकों तक सीमित नहीं है. ऐसे में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC), शेयर बाजार, पेमेंट सिस्टम, टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर, महत्वपूर्ण थर्ड-पार्टी सर्विस और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क को भी मजबूत रखना जरूरी है.
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