जिस IIT में पढ़ीं उसी की विदेशी शाखा की संभाली कमान, जानें कौन हैं प्रीति?


प्रीति अघालयम ने 1991 में आईआईटी मद्रास में केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक में एडमिशन लिया और 1995 में डिग्री पूरी की. इसके बाद उन्होंने अमेरिका का रुख किया और केमिकल इंजीनियरिंग में आगे की पढ़ाई और रिसर्च की. आईआईटी मद्रास से पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रीति ने अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ रोचेस्टर से केमिकल इंजीनियरिंग में एमएस किया. इसके बाद उन्होंने अमेरिका में ही पीएचडी पूरी की और आगे पोस्ट डॉक्टोरल रिसर्च के लिए एमआईटी से जुड़ी.

प्रीति अघालयम ने 1991 में आईआईटी मद्रास में केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक में एडमिशन लिया और 1995 में डिग्री पूरी की. इसके बाद उन्होंने अमेरिका का रुख किया और केमिकल इंजीनियरिंग में आगे की पढ़ाई और रिसर्च की. आईआईटी मद्रास से पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रीति ने अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ रोचेस्टर से केमिकल इंजीनियरिंग में एमएस किया. इसके बाद उन्होंने अमेरिका में ही पीएचडी पूरी की और आगे पोस्ट डॉक्टोरल रिसर्च के लिए एमआईटी से जुड़ी.

रिसर्च का एक्सपीरियंस लेने के बाद वह भारत लौटी और अपने एकेडमी करियर की शुरुआत आईआईटी बॉम्बे में केमिकल इंजीनियरिंग फैकल्टी के रूप में की. इसके बाद 2010 में उन्होंने आईआईटी मद्रास ज्वाइन किया और केमिकल इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर के तौर पर काम करने लगी. इस तरह जिस संस्थान से उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की कुछ वर्षों बाद वही टीचर और रिसर्चर के रूप में लौट आई.

रिसर्च का एक्सपीरियंस लेने के बाद वह भारत लौटी और अपने एकेडमी करियर की शुरुआत आईआईटी बॉम्बे में केमिकल इंजीनियरिंग फैकल्टी के रूप में की. इसके बाद 2010 में उन्होंने आईआईटी मद्रास ज्वाइन किया और केमिकल इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर के तौर पर काम करने लगी. इस तरह जिस संस्थान से उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की कुछ वर्षों बाद वही टीचर और रिसर्चर के रूप में लौट आई.

प्रीति अघालयम के करियर में बड़ा मोड़ 2023 में आया, उन्हें आईआईटी मद्रास के Zanzibar कैंपस का डायरेक्टर ऑफ चार्ज नियुक्त किया गया. यह आईआईटी मद्रास का पहला अंतरराष्ट्रीय कैंपस है, जो तंजानिया के Zanzibar में स्थित है. इस जिम्मेदारी के साथ प्रीति आईआईटी की विदेश स्थित शाखा का नेतृत्व करने वाली पहली महिला बनी. नए कैंपस को शुरू करने और उसके एकेडमिक और प्रशासनिक ढांचे को तैयार करने की जिम्मेदारी भी उनके काम का हिस्सा रही.

प्रीति अघालयम के करियर में बड़ा मोड़ 2023 में आया, उन्हें आईआईटी मद्रास के Zanzibar कैंपस का डायरेक्टर ऑफ चार्ज नियुक्त किया गया. यह आईआईटी मद्रास का पहला अंतरराष्ट्रीय कैंपस है, जो तंजानिया के Zanzibar में स्थित है. इस जिम्मेदारी के साथ प्रीति आईआईटी की विदेश स्थित शाखा का नेतृत्व करने वाली पहली महिला बनी. नए कैंपस को शुरू करने और उसके एकेडमिक और प्रशासनिक ढांचे को तैयार करने की जिम्मेदारी भी उनके काम का हिस्सा रही.

इस कैंपस में अक्टूबर 2023 से पढ़ाई शुरू हुई. यहां अंडर ग्रेजुएट स्तर पर अलग-अलग प्रोग्राम शुरू किए गए, जिनमें केमिकल इंजीनियरिंग और डेटा साइंस एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे सब्जेक्ट शामिल है. कैंपस की जिम्मेदारी संभालने के बाद प्रीति ने आईआईटी मद्रास में एक नई भूमिका संभाली. अब वह डीन ग्लोबल इंगेजमेंट के तौर पर संस्थान के अंतरराष्ट्रीय स्तर से जुड़े काम देखती है. आईआईटी मद्रास की वेबसाइट पर उन्हें कैंपस की पूर्व डायरेक्टर इन चार्ज के रूप में लिस्टेड किया गया है.

इस कैंपस में अक्टूबर 2023 से पढ़ाई शुरू हुई. यहां अंडर ग्रेजुएट स्तर पर अलग-अलग प्रोग्राम शुरू किए गए, जिनमें केमिकल इंजीनियरिंग और डेटा साइंस एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे सब्जेक्ट शामिल है. कैंपस की जिम्मेदारी संभालने के बाद प्रीति ने आईआईटी मद्रास में एक नई भूमिका संभाली. अब वह डीन ग्लोबल इंगेजमेंट के तौर पर संस्थान के अंतरराष्ट्रीय स्तर से जुड़े काम देखती है. आईआईटी मद्रास की वेबसाइट पर उन्हें कैंपस की पूर्व डायरेक्टर इन चार्ज के रूप में लिस्टेड किया गया है.

प्रीति का करियर आईआईटी मद्रास की छात्रा से लेकर प्रोफेसर और एक अंतरराष्ट्रीय कैंपस के अकादमिक लीडर बनने तक पहुंचा है. वहीं आपको बता दें कि प्रीति अघालयम की कहानी सिर्फ एक आईआईटी ग्रेजुएट के करियर की नहीं है, उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद विदेश में हायर एजुकेशन और रिसर्च की. फिर भारत लौटकर एकेडमी क्षेत्र में काम किया और अपने ही संस्थान के अंतरराष्ट्रीय कैंपस को खड़ा करने की जिम्मेदारी संभाली.

प्रीति का करियर आईआईटी मद्रास की छात्रा से लेकर प्रोफेसर और एक अंतरराष्ट्रीय कैंपस के अकादमिक लीडर बनने तक पहुंचा है. वहीं आपको बता दें कि प्रीति अघालयम की कहानी सिर्फ एक आईआईटी ग्रेजुएट के करियर की नहीं है, उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद विदेश में हायर एजुकेशन और रिसर्च की. फिर भारत लौटकर एकेडमी क्षेत्र में काम किया और अपने ही संस्थान के अंतरराष्ट्रीय कैंपस को खड़ा करने की जिम्मेदारी संभाली.

Published at : 01 Oct 2026 08:27 AM (IST)

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