कौन हैं भारत की जीत के हीरो तन्मय बलोदा? ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ झटके 14 विकेट

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अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी बी स्टेडियम में खेले गए दूसरे अनाधिकारिक टेस्ट मैच में भारत की अंडर-19 टीम ने ऑस्ट्रेलिया की अंडर-19 टीम को 10 विकेट से हरा दिया. भारतीय टीम की इस जीत के हीरो रहे तन्मय बलोदा. तन्मय ने 14 विकेट लेकर इतिहास रच दिया. 

इस मैच में ऑस्ट्रेलिया ने अपनी पहली पारी में सिर्फ 174 रन बनाए थे. भारतीय टीम के लिए तन्मय बलोदा ने 6 विकेट चटकाए. तन्मय ने 25 ओवर में 32 रन देकर 6 कंगारू बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा. इस दौरान उन्होंने 11 मेडन ओवर भी किए. 

इसके बाद भारत की अंडर-19 टीम ने अपनी पहली पारी में 315 रन बना डाले, और 141 रनों की मैच विनिंग बढ़त हासिल की. दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलिया की टीम सिर्फ 151 रन पर ऑलआउट हो गई. इस बार तन्मय बलोदा ने 8 विकेट झटके. दूसरी पारी में तन्मय ने 19.5 ओवर 41 रन देकर 8 विकेट लिए. भारतीय टीम को 11 रनों का लक्ष्य मिला, जिसे उसने पहले ओवर में ही हासिल कर लिया. इस तरह तन्मय ने मैच में कुल 14 विकेट चटकाए. 

जानें कौन हैं तन्मय बलोदा?

तन्मय बलोदा एक स्पिन ऑलराउंडर हैं. 19 साल के तन्मय बाएं हाथ से गेंदबाजी करते हैं, और दाएं हाथ के बल्लेबाज हैं. तन्मय का जन्म 9 अगस्त 2008 को पलवल (हरियाणा) में हुआ. तन्मय ने फर्स्ट क्लास करियर में 2 मैच खेले, जिसमें 10 विकेट लेने के अलावा 40 रन बनाए हैं. उन्होंने इसी साल जनवरी में असम के खिलाफ रणजी ट्रॉफी मैच में कुल 6 विकेट लिए और 15 रन बनाए. इसके बाद उन्होंने बंगाल के खिलाफ 5 विकेट लेने के अलावा 12* और 13 रन बनाएं. इसके बाद यूथ टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 14 विकेट लेकर अपना जलवा बिखेरा.

रोहतक के इस खिलाड़ी को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ यूथ टेस्ट में बतौर रिप्लेसमेंट मौका मिला था. रोहित यादव उम्र से जुड़ी अनियमितताओं के चलते टीम से बाहर किए गए, जिसके बाद तन्मय को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया और इस खिलाड़ी ने चयनकर्ताओं को सही साबित किया.

पहले तेज गेंदबाज थे तन्मय 

तन्मय बलोदा शुरुआत में तेज गेंदबाजी किया करते थे. उन्होंने हरियाणा के लिए अंडर-16 क्रिकेट के दौरान तेज गेंदबाज के तौर पर शुरुआत की थी. हालांकि, एक टूर्नामेंट के कुछ मैचों में उन्होंने स्पिन गेंदबाजी की और शानदार सफलता हासिल की. इसके बाद से तन्मय ने तेज गेंदबाजी छोड़कर स्पिन गेंदबाजी शुरू कर दी. तन्मय बलोदा को क्रिकेट का जुनून ऐसा था कि उन्होंने 10वीं पास करने के बाद पढ़ाई की जगह क्रिकेट को चुना. परिवार ने भी बेटे के इस फैसले में उसका साथ दिया. आज तन्मय अपने फैसले पर और सबकी उम्मीदों पर खरा उतर रहे हैं.

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