थाली पर बड़ा संकट, आपकी रसोई के कौन-कौनसे सामान होंगे सबसे ज्यादा महंगे?

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महंगाई का असर सिर्फ पेट्रोल-डीजल या बिजली के बिल तक सीमित नहीं रहता. अगर दुनिया में खाने-पीने की चीजों की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ता है तो इसका सीधा असर हमारी रसोई और महीने के बजट पर भी पड़ सकता है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में आने वाले महीनों में बड़े खाद्य संकट की आशंका जताई है. इसके पीछे उन्होंने युद्ध, मौसम और खाद की सप्लाई में आ रही दिक्कतों जैसे कारणों का जिक्र किया है.

ऐसे में सवाल है कि अगर यह स्थिति गंभीर होती है तो आम आदमी की थाली में कौन-कौन सी चीजें सबसे ज्यादा महंगी हो सकती हैं?

चावल होगा महंगा?
खाद्य संकट की स्थिति में सबसे पहले नजर अनाज की कीमतों पर जाती है. खासकर चावल को लेकर एशिया में चिंता बढ़ सकती है. मौसम खराब होने, कम बारिश और सूखे जैसी स्थिति से चावल का उत्पादन प्रभावित हो सकता है. भारत दुनिया के बड़े चावल उत्पादकों और निर्यातकों में शामिल है. अगर उत्पादन या अंतरराष्ट्रीय सप्लाई पर दबाव बढ़ता है तो घरेलू बाजार में भी कीमतों पर असर पड़ सकता है.

हालांकि भारत के पास सरकारी अनाज भंडार एक बड़ा सुरक्षा कवच है. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि बाजार में कीमतों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. 

आटा और गेहूं भी होंगे महंगे?
अगर मौसम की वजह से गेहूं का उत्पादन प्रभावित होता है तो इसका असर सीधे आटा, मैदा और गेहूं से बने दूसरे सामान पर पड़ सकता है. गेहूं की कीमत बढ़ने का मतलब सिर्फ आटे का महंगा होना नहीं है. बिस्किट, ब्रेड, नमकीन और कई दूसरे पैकेज्ड फूड का बजट भी बढ़ सकता है. 

दाल और खाने का तेल का बढ़ेगा रेट?
खाद्य संकट बढ़ने पर दालों और खाने के तेल की कीमतों पर भी दबाव आ सकता है. इनकी कीमतें घरेलू उत्पादन के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार और आयात पर भी निर्भर करती हैं.

अगर किसी देश में फसल खराब होती है या निर्यात कम किया जाता है तो दूसरे देशों में सप्लाई घट सकती है. ऐसे में आयात करने वाले देशों के लिए सामान महंगा हो जाता है और इसका असर आगे चलकर आम आदमी पर भी पड़ सकता है.

खाद की कीमत बढ़ी तो क्या होगा?
महंगाई का एक बड़ा कारण सिर्फ फसल का खराब होना नहीं है. किसानों की लागत बढ़ना भी इसकी वजह बन सकता है. रूस, पश्चिम एशिया और दूसरे भू-राजनीतिक तनावों के कारण खाद की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है.

रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल में यूरिया की कीमत 850 डॉलर प्रति मीट्रिक टन से ऊपर चली गई थी, जो फरवरी के मुकाबले करीब 80 फीसदी ज्यादा थी. फॉस्फेट की कीमतों में भी 25-30 फीसदी की बढ़ोतरी बताई गई है. अगर खाद महंगी होती है तो किसानों की खेती की लागत बढ़ती है. इसका असर आगे चलकर फसल की कीमतों में दिखाई दे सकता है.

सिर्फ युद्ध नहीं, मौसम भी बड़ी वजह
इस पूरे संकट में मौसम की भूमिका भी अहम है. मजबूत El Niño की आशंका से एशिया समेत कई क्षेत्रों में बारिश और खेती प्रभावित होने की चिंता है. चावल, मक्का और दूसरी फसलों के उत्पादन पर इसका असर पड़ सकता है. 

यानी एक तरफ युद्ध और सप्लाई चेन की समस्या है, तो दूसरी तरफ मौसम का खतरा है. अगर दोनों का असर एक साथ आता है तो खाने की चीजों की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है.

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