इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) के एंटी करप्शन चीफ एंड्रयू एफग्रेव ने संन्यास ले चुके क्रिकेटरों की लीजेंड्स लीग पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि लीजेंड्स लीग “वास्तव में संदिग्ध क्षेत्र” है, क्योंकि वे ज्यादातर अनधिकृत (Unauthorized) होती हैं और खेल के लिए “प्रतिष्ठा का खतरा” पैदा करती हैं.
आईसीसी एंटी करप्शन चीफ एंड्रयू एफग्रेव ने ‘क्रिकइंफो’ को एक इंटरव्यू दिया है. इस इंटरव्यू में ही उनसे पूछा गया कि क्या संन्यास ले चुके खिलाड़ियों की लीजेंड्स लीग ‘सिरदर्द’ बन गई हैं? इसके जवाब में उन्होंने मौजूदा स्थिति को अस्पष्ट बताया. उन्होंने कहा, “यह वास्तव में एक अस्पष्ट स्थिति है, क्योंकि कई बार इन्हें मंजूरी नहीं मिलती और निश्चित रूप से आईसीसी की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) भी नहीं मिलती. घरेलू बोर्ड इन्हें मंजूरी नहीं देते हैं. लेकिन यह थोड़ा अस्पष्ट मामला है, क्योंकि इनमें खेलने वाले बहुत से खिलाड़ी क्रिकेट के मौजूदा ढांचे का हिस्सा नहीं हैं.”
एंड्रयू एफग्रेव ने आगे कहा, “हालांकि, उनमें से काफी अब भी प्रतिष्ठित नाम हैं. मुझे लगता है कि इसमें विरासत और उस खिलाड़ी को देखने की इच्छा के बीच संतुलन बनाना जरूरी है, जिसे आपने बड़े होते हुए खेलते देखा है और इससे जुड़े जोखिम के बीच भी संतुलन होना चाहिए.”
आईसीसी एंटी करप्शन के चीफ ने श्रीलंका में आयोजित एक लीजेंड्स लीग का उदाहरण भी दिया, जहां टीम मालिकों पर भ्रष्टाचार के आरोप में मुकदमा चलाया गया. गौरतलब है कि हाल के सालों में लीजेंड्स लीग काफी आम हो गई हैं, जिनमें भारत समेत कई देशों के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी हिस्सा लेते नजर आते हैं. इन लीगों में अधिकतर ऐसे खिलाड़ी भी खेलते हैं, जिन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट नहीं खेला है या फिर बहुत ज्यादा डोमेस्टिक क्रिकेट भी नहीं खेला है. पिछले कुछ समय से कई लीजेंड्स लीग में खिलाड़ियों ने अपनी सैलरी नहीं मिलने की शिकायत भी की है.
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