- निर्मला सीतारमण: भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता अहम मोड़ पर.
- व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में, अमेरिका दबाव बना रहा.
- भारत घरेलू हितों की रक्षा कर रहा, टैरिफ अब हथियार.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बात की. उन्होंने कहा कि दोनों के बीच बातचीत एक ऐसे अहम मोड़ पर पहुंच गई है, जहां किसी के लिए भी और रियायतें देना या लेना ‘बहुत-बहुत मुश्किल’ होगा. उन्होंने यह भी जानकारी दी कि दोनों देशों के बीच बातचीत अभी भी जारी है, लेकिन अब अतिरिक्त समझौते की गुंजाइश कम बची है.
भारत के पक्ष में ट्रेड बैंलेस
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील की सबसे बड़ी बात यह है कि व्यापार संतुलन (Trade Balance) भारत के पक्ष में है. ऐसे में अमेरिका दूसरे तरीकों से भी भारत के साथ अपने व्यापार असंतुलन को कम करने की कोशिश कर रहा है.
बता दें कि भारत, अमेरिका को बड़े पैमाने पर कपड़े, सॉफ्टवेयर, जेम्स एंड जूलरी, दवाओं का निर्यात करता है. जबकि इसके मुकाबले अमेरिका का भारत के लिए निर्यात कम है इसलिए उसका भारत के साथ व्यापार घाटा बढ़ रहा है. इसी नुकसान की भरपाई के लिए अमेरिका भारत पर अपने बाजारों को अमेरिकी कृषि उत्पादों, डेयरी और मेडिकल डिवाइस के लिए अधिक खोलने का दबाव बनाता है.
जबकि भारत अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था, खासतौर पर छोटे किसानों, एमएसएमई (MSME) और श्रम-प्रधान (Labor-intensive) क्षेत्रों के हितों को ध्यान में रखकर ही बातचीत आगे बढ़ा रहा है, जिससे आगे झुकना मुश्किल हो गया है.
#WATCH | Speaking on US-India trade deal negotiations at the Munich Leaders Meeting, Union Finance Minister Nirmala Sitharaman says, “The agreement negotiations are still ongoing, although we’d like to believe that both the sides have reached a plateau beyond which giving or taking might be very, very difficult. But maybe if there are rooms to operate from, both sides would do it…”
— ANI (@ANI) October 5, 2026
टैरिफ का हथियार के रूप में इस्तेमाल
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जिस टैरिफ का इस्तेमाल पहले कभी आपसी सहमति और छूट के लिए एक उपकरण के तौर किया जाता था, आज उसका इस्तेमाल एक हथियार के तौर पर होने लगा है.
अमेरिका अपने व्यापार घाटे को कम करने के लिए भारत से लगातार बड़ी रियायतें और अधिक बार पहुंच की मांग कर रहा है. भारत का मानना है कि उसने पहले ही पर्याप्त रास्ते खोले हैं और अब और रियायतें देना हितों के खिलाफ हो सकता है. अब अमेरिका इसी व्यापार घाटे को पाटने के लिए एकतरफा ऊंचे टैरिफ लगाने की धमकी या कार्रवाई कर रहे हैं.
कब से चल रही ट्रेड डील पर बात?
भारत और अमेरिका के बीच फरवरी 2025 से ट्रेड डील पर बातचीत चल रही है. दोनों ही देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुने से ज्यादा बढ़ाकर 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. यह बातचीत एक साल से ज्यादा समय से चल रही है और दोनों पक्ष पहले कदम के तौर पर एक अंतरिम समझौते पर काम कर रहे हैं.
फरवरी 2026 में, भारत और अमेरिका ने एक अंतरिम व्यापार समझौते के लिए रूपरेखा की घोषणा की, जिसमें अमेरिकी बाजार में भारतीय वस्तुओं के लिए रियायतें, आईटी व फार्मा क्षेत्र को बढ़ावा और भारत द्वारा कुछ चुनिंदा अमेरिकी औद्योगिक व कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम करने जैसे प्रस्ताव शामिल किए गए. साथ ही, यह भी तय हुआ कि व्यापक BTA के लिए दीर्घकालिक बातचीत जारी रहेगी.
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