UPI पेमेंट पर MDR शुल्क को लेकर व्यापारियों का विरोध तेज होता जा रहा है. दिल्ली के व्यापारियों के संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने UPI MDR को लेकर बड़ा ऐलान किया है. CTI ने कहा है कि अगर 15 अक्टूबर से UPI पर चार्ज लागू किया गया तो व्यापारी इसके विरोध में UPI पेमेंट का पूर्ण बहिष्कार कर सकते हैं.
CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने इस संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर सरकार से 15 अक्टूबर से UPI MDR शुल्क को रोल बैक करने की मांग की है. व्यापारियों का कहना है कि UPI आज छोटे-बड़े कारोबार में भुगतान का सबसे अहम माध्यम बन चुका है. ऐसे में इस पर एक्सट्रा फीस लगाने से व्यापारियों के खर्च बढ़ सकते हैं.
क्यों नाराज हैं व्यापारी?
CTI के मुताबिक, दिल्ली समेत देशभर के व्यापारियों में UPI MDR फीस को लेकर भारी नाराजगी है. व्यापारियों का कहना है कि छोटे दुकानदारों के लिए हर डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त लागत कारोबार पर सीधा असर डाल सकती है.
आज किराना दुकानों से लेकर कपड़े, जूते, इलेक्ट्रॉनिक्स, रेस्टोरेंट और अन्य बाजारों में ग्राहक बड़ी संख्या में UPI से भुगतान करते हैं. ऐसे में UPI पर चार्ज लगने पर व्यापारियों को एक्स्ट्रा वित्तीय बोझ उठाना पड़ सकता है. CTI का कहना है कि सरकार को डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के बजाय उस पर शुल्क लगाने की व्यवस्था पर दोबारा विचार करना चाहिए.
15 अक्टूबर से UPI बहिष्कार की चेतावनी
CTI ने साफ किया है कि अगर 15 अक्टूबर से UPI MDR शुल्क लागू किया जाता है, तो संगठन इसके विरोध में UPI पेमेंट का पूर्ण बहिष्कार करने का फैसला ले सकता है.
व्यापारियों का कहना है कि UPI का इस्तेमाल आज सिर्फ बड़े कारोबारियों तक सीमित नहीं है. छोटे दुकानदार और स्ट्रीट वेंडर तक डिजिटल पेमेंट स्वीकार कर रहे हैं. ऐसे में MDR लागू होने से सबसे ज्यादा असर छोटे व्यापारियों पर पड़ने की आशंका है.
वित्त मंत्री को लिखा पत्र
CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र भेजकर UPI MDR शुल्क को वापस लेने की मांग की है. संगठन ने सरकार से अपील की है कि 15 अक्टूबर से प्रस्तावित शुल्क को लागू न किया जाए और व्यापारियों को राहत दी जाए.
CTI का कहना है कि व्यापारियों और आम लोगों के लिए UPI भुगतान को आसान और कम लागत वाला बनाए रखना जरूरी है. संगठन ने सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है.
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