- वर्तमान में वाणिज्यिक सिलेंडर दिल्ली में ₹2810, हाल ही में बढ़ी.
- 2014 में ₹1503 था, 2016 में ₹838 न्यूनतम स्तर.
- महामारी बाद 2021 में ₹1736, अब ₹2800-₹3000 तक.
आज 5 अक्टूबर 2026 को 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत दिल्ली में 2810 रुपये है. वहीं, मुंबई में कीमत 2,764 रुपये है. पटना में इसकी कीमत 3,100 रुपये है. अभी हाल ही में 1 अक्टूबर को इसकी कीमत में 62.50 रुपये से 71.50 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई, जो त्योहारी सीजन में एलपीजी ग्राहकों के लिए किसी झटके से कम नहीं है. आज जिस कमर्शियल सिलेंडर के लिए आपको हजारों रुपये चुकाने पड़ रहे हैं, कभी उसी की कीमत महज 838 रुपये थी.
12 साल पहले कितनी थी कीमत?
आज से 12 साल पहले यानी कि 2014 में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 1,503 रुपये थी. यह वही साल है, जब केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भाजपा की सरकार बनी थी. तब से लेकर आज तक कमर्शियल सिलेंडर के दाम 1,307 रुपये तक बढ़ चुके हैं. वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट के चलते साल 2015 में कमर्शियल गैस काफी सस्ती हो गई थी.
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, साल 2015 में कमर्शियल सिलेंडर की कीमतें 1,005 से 1,151 के बीच बरकरार रहीं. इस एक साल के दरमियान कीमतें कई बार घटाई गईं. 1 अक्टूबर 2014 को सबसे पहले इसके दाम 30.50 रुपये कम हुए, जिससे कीमत 1,472.50 रुपये पर आ गई. इसी साल दिसंबर तक कीमतें 1,267 रुपये पर आ गई थीं. धीरे-धीरे कीमतों में हुई इस कटौती के चलते सितंबर 2015 तक इसकी कीमतें 1,005.50 रुपये पर आ गईं.
838 रुपये कब हुई कीमत?
साल 2016 के सितंबर महीने में दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत महज 838 रुपये रह गई थी. बीते 15 सालों में यह कमर्शियल गैस सिलेंडर का अब तक का सबसे निचला स्तर था. इसके बाद अक्टूबर में इसकी कीमतों में 57 रुपये की बढ़ोतरी की गई, जिससे यह 895 का हो गया.
कोरोना महामारी के बाद वैश्विक बाजारों में मांग में अचानक आई तेजी और सप्लाई कम होने की वजह से अक्टूबर 2021 में इसकी कीमत 1,736.50 पर पहुंच गई. इसके एक साल बाद यानी कि अक्टूबर 2022 में कीमतें 1,859.50 पर आ गई थीं. कीमतों में उतार-चढ़ाव का यह क्रम कभी रुपये में मजबूती, तो कभी क्रूड की सप्लाई में तेजी के चलते लगातार बरकरार रहा और अब कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतें 2800-3000 के स्तर पर पहुंच चुकी हैं.
ये भी पढ़ें:
एशिया के लिए तेल हुआ सस्ता, यूरोप के लिए बढ़ीं कीमतें, सऊदी अरब का बड़ा फैसला