चोट के बाद जब उमेश यादव ने करीब एक साल बाद क्रिकेट में वापसी की, तो उन्हें लगा था कि विदर्भ की टीम उनका साथ देगी. लेकिन उमेश के मुताबिक, वापसी के बाद उन्हें टीम से वो समर्थन नहीं मिला जिसकी उन्हें उम्मीद थी. उनका दावा है कि उन्हें दोबारा मौका देने की जगह उन्हें टीम से बाहर करने की बातें होने लगी थीं. इसी वजह से लंबे समय से विदर्भ के लिए खेलने वाले उमेश ने अब पंजाब का रुख कर लिया है.
उमेश यादव ने बताया कि 2024 में एकिलिस टेंडन की सर्जरी के बाद वो करीब एक साल तक क्रिकेट से दूर रहे. जब वो वापस आए तो टीम में अपनी जगह को लेकर उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा. उमेश ने बताया कि उन्होंने 2025-26 सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के लिए टी20 टीम की कप्तानी मांगी थी. उन्हें लगा था कि कप्तानी मिलने से वापसी में मदद मिलेगी, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई.
दो मैच खेलने के बाद बाहर बैठाया
उमेश के मुताबिक, उन्हें टूर्नामेंट में सिर्फ दो मैच खेलने का मौका मिला. इसके बाद कई मुकाबलों में वो टीम से बाहर रहे. टीम मैनेजमेंट से बात करने के बाद उन्हें ग्रुप स्टेज के आखिरी मैच में खेलने का मौका मिला.
इसके बाद 2025-26 विजय हजारे ट्रॉफी की टीम में उन्हें जगह नहीं मिली. उमेश का कहना है कि उन्हें बाहर किए जाने की कोई वजह भी नहीं बताई गई.
बोले मुझे बाहर करने की तैयारी थी
उमेश ने कहा कि चोट से वापसी के बाद उन्हें ऐसा लगा कि उन्हें संभालने और उनका हौसला बढ़ाने के बजाय टीम से बाहर करने पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा था. उन्होंने यह भी बताया कि टीम चुनने वालों और कोचों ने युवा खिलाड़ियों को कप्तानी की जिम्मेदारी दी.
विदर्भ के लिए आखिरी मैच
उमेश ने विदर्भ के लिए अपना आखिरी मैच 8 दिसंबर 2025 को आंध्र प्रदेश के खिलाफ सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में खेला था. उन्होंने इस मुकाबले में 4 ओवर में 28 रन देकर 2 विकेट लिए थे. इसके बाद 2026-27 घरेलू सीजन से पहले उमेश ने विदर्भ छोड़कर पंजाब टीम से जुड़ने का फैसला किया.
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