
मंजिल सैनी का जन्म सितंबर 1975 में दिल्ली में हुआ था. उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से फिजिक्स की पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से हायर एजुकेशन की पढ़ाई पूरी की, जहां उन्हें गोल्ड मेडल मिला था. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने करीब 3 साल तक कॉर्पोरेट सेक्टर में काम किया था. इसी दौरान उन्होंने सिविल सेवा में जाने का फैसला किया और यूपीएससी की तैयारी शुरू की.

मंजिल सैनी ने 2005 में सिविल सेवा परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में सफल हुई. परीक्षा के समय वह प्रेग्नेंट थी. सिविल सेवा में सफल होने के बाद मंजिल सैनी को उत्तर प्रदेश कैडर मिला और वह 2005 बैच के आईपीएस अधिकारी बनी. उनकी शुरुआती पोस्टिंग उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस के तौर पर हुई. यही उनके करियर का पहला बड़ा मामला सामने आया, जिसने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई.

मुरादाबाद में तैनाती के दौरान मंजिल सैनी उस जांच का हिस्सा बनी, जिसमें डॉक्टर अमित कुमार से जुड़े किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का खुलासा हुआ था. जांच आगे बढ़ने पर किडनी और अवैध खरीद-फरोख्त से जुड़े अस्पताल और बिचौलियों का नेटवर्क सामने आया. पुलिस ने इस मामले में छापेमारी की और बाद में जांच सीबीआई को सौंप दी गई.

इस केस के बाद पुलिस और मीडिया वर्ग में मंजिल सैनी को लेडी सिंघम नाम से भी जाना जाने लगा. इसके बाद उन्होंने बांदा, मुजफ्फरनगर, मथुरा और इटावा समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों में जिम्मेदारियां संभाली. मई 2016 में मंजिल सैनी को लखनऊ का एसपी नियुक्त किया गया. वह उत्तर प्रदेश में लखनऊ पुलिस की कमान संभालने वाली पहली महिला अधिकारी बनी. लखनऊ में उनके कार्यकाल के दौरान फरवरी 2027 में कारोबारी श्रवण साहू की हत्या का मामला भी सामने आया.

मंजिल सैनी के पुलिस करियर में 2017 का मेरठ बंधक बचाव अभियान भी अहम रहा. अधिकारी गैलंट्री अवॉर्ड के मुताबिक उन्होंने दूसरे पुलिस अधिकारियों के साथ हथियारबंद अपहरणकर्ताओं की और बढ़कर कार्रवाई की और अगवा किए गए डॉक्टर को सुरक्षित बचाया.

इस ऑपरेशन में उनके साहस और कर्तव्य के प्रति समर्पण को देखते हुए, उन्हें 2024 में गैलंट्री मेडल से सम्मानित किया गया. उत्तर प्रदेश पुलिस के रिकॉर्ड में भी उनके इस सम्मान का जिक्र है.
Published at : 26 Sep 2026 08:25 AM (IST)