अचानक नौकरी छूट जाए, मेडिकल इमरजेंसी आ जाए या घर में कोई बड़ा खर्च सामने खड़ा हो जाए, तो ऐसी स्थिति में सबसे ज्यादा जरूरत उस पैसे की होती है जिसे बिना किसी परेशानी के तुरंत निकाला जा सके। इसी वजह से इमरजेंसी फंड बनाना जरूरी माना जाता है.लेकिन अगर आपके पास 5 लाख रुपये की बचत है, तो इसे कहां रखना बेहतर होगा? बैंक के सेविंग अकाउंट में, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में या लिक्विड म्यूचुअल फंड में? सही विकल्प चुनने से पहले इनके फायदे और सीमाएं समझना जरूरी है.
इमरजेंसी फंड का एक हिस्सा सेविंग अकाउंट में रखना उपयोगी साबित हो सकता है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि जरूरत पड़ने पर पैसा आसानी से निकाला जा सकता है. अचानक अस्पताल का बिल भरना हो या कोई जरूरी भुगतान करना हो, तो निवेश भुनाने का इंतजार नहीं करना पड़ता. हालांकि, सामान्य बचत खातों पर ब्याज अपेक्षाकृत कम मिल सकता है. इसलिए पूरी रकम इसी खाते में रखने से बेहतर रिटर्न पाने के अवसर सीमित हो सकते हैं.
FD पर निश्चित ब्याज का विकल्प
बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है जो अपनी रकम पर पहले से तय ब्याज पाना चाहते हैं. इसकी ब्याज दर बैंक और जमा की अवधि के अनुसार अलग-अलग होती है. लेकिन FD में पैसा जमा करने से पहले समय से पहले निकासी की शर्तें जरूर जांचनी चाहिए. जरूरत के समय मैच्योरिटी से पहले रकम निकालने पर पेनल्टी लग सकती है या ब्याज कम मिल सकता है. इसलिए पूरी इमरजेंसी बचत को लंबी अवधि की FD में रखना सुविधाजनक नहीं होता.
लिक्विड म्यूचुअल फंड
लिक्विड म्यूचुअल फंड मुख्य रूप से छोटी अवधि के डेट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं. इनमें पैसा अपेक्षाकृत जल्दी निकाला जा सकता है, लेकिन रकम बैंक खाते में आने में समय लग सकता है. इनका रिटर्न बाजार से जुड़ा होता है और इसकी कोई गारंटी नहीं होती. इसलिए इन्हें पूरी तरह जोखिम-मुक्त विकल्प नहीं समझना चाहिए.
5 लाख रुपये को कैसे बांट सकते हैं?
बैंक बाजार के CEO अधिल शेट्टी के सुझाव के मुताबिक, उदाहरण के तौर पर 5 लाख के इमरजेंसी फंड को तीन हिस्सों में बांटा जा सकता है:
1 लाख- सेविंग अकाउंट में, ताकि तुरंत जरूरत पूरी हो सके.
2 लाख- FD में, जिससे तय शर्तों के अनुसार ब्याज मिल सके.
2 लाख- लिक्विड म्यूचुअल फंड में, जहां से जरूरत के मुताबिक रकम निकालने का विकल्प हो.
यह केवल एक उदाहरण है, हर व्यक्ति के लिए यही बंटवारा जरूरी नहीं है. सही अनुपात आपकी मासिक जरूरतों, नौकरी की स्थिरता और जोखिम उठाने की क्षमता पर निर्भर करेगा.
सबसे ज्यादा रिटर्न नहीं, सुरक्षा है प्राथमिकता
इमरजेंसी फंड का उद्देश्य अधिकतम मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि मुश्किल समय में आर्थिक सहारा देना है. इसलिए निवेश का विकल्प चुनते समय पैसे की उपलब्धता, मूल रकम की सुरक्षा और निकासी की शर्तों को प्राथमिकता दें. जरूरत के हिसाब से सेविंग अकाउंट, FD और लिक्विड फंड का संतुलित इस्तेमाल किया जा सकता है.
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