8वें वेतन आयोग को लेकर सरकारी कर्मचारियों की उम्मीदें बढ़ती जा रही हैं. अलग-अलग कर्मचारी संगठन अपनी मांगें आयोग के सामने रख रहे हैं. अब रेलवे के टेक्निकल सुपरवाइजर्स ने भी वेतन बढ़ोतरी को लेकर बड़ा प्रस्ताव दिया है. इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने मांग की है कि कर्मचारियों की सालाना वेतन वृद्धि को मौजूदा 3% से बढ़ाकर 5% किया जाए. इसके अलावा, संगठन ने अलग-अलग पे लेवल के लिए 2.92 से लेकर 4.38 तक फिटमेंट फैक्टर लागू करने का सुझाव दिया है.
ये रेलवे कर्मचारियों के संगठन की मांगें हैं. 8वें वेतन आयोग ने अभी इन्हें मंजूरी नहीं दी है. अंतिम फैसला आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा.
क्या है मांग?
फिलहाल केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को सालाना इंक्रीमेंट बेसिक सैलरी के 3% के हिसाब से मिलता है. IRTSA चाहता है कि इसे बढ़ाकर 5% किया जाए. संगठन का कहना है कि महंगाई बढ़ने के साथ कर्मचारियों के खर्च भी बढ़ते हैं.
फिटमेंट फैक्टर को लेकर क्या कहा गया?
रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स ने सिर्फ सालाना इंक्रीमेंट बढ़ाने की मांग नहीं की है. संगठन चाहता है कि 8वें वेतन आयोग में सभी कर्मचारियों के लिए एक ही फिटमेंट फैक्टर लागू करने के बजाय अलग-अलग पे लेवल के हिसाब से इसे तय किया जाए.
IRTSA ने अलग-अलग पे लेवल के लिए ये फिटमेंट फैक्टर सुझाए हैं, जैसे लेवल 1 से 3 के कर्मचारियों के लिए 2.92 का फिटमेंट फैक्टर, लेवल 4 से 8 के कर्मचारियों के लिए 3.50 का फिटमेंट फैक्टर, लेवल 9 से 13 के कर्मचारियों के लिए 3.80 का फिटमेंट फैक्टर, लेवल 14 से 16 के कर्मचारियों के लिए 4.09 का फिटमेंट फैक्टर और लेवल 17 से 18 के कर्मचारियों के लिए 4.38 का फिटमेंट फैक्टर लागू करने का प्रस्ताव दिया है.
सब के लिए एक फिटमेंट फैक्टर क्यों नहीं?
IRTSA का कहना है कि रेलवे के टेक्निकल और सुरक्षा से जुड़े कर्मचारियों की जिम्मेदारियां दूसरे कर्मचारियों से अलग होती हैं. उनके काम में तकनीकी जानकारी, सुरक्षा से जुड़े फैसले और कई बार मुश्किल परिस्थितियों में काम करना शामिल होता है.
संगठन के मुताबिक, कर्मचारियों के काम की जिम्मेदारी, जोखिम, काम के घंटे और जरूरी तकनीकी योग्यता को ध्यान में रखकर वेतन तय किया जाना चाहिए. इसी वजह से वह अलग-अलग पे लेवल के लिए अलग फिटमेंट फैक्टर चाहता है. संगठन ने यह भी कहा है कि फील्ड में काम करने वाले तकनीकी कर्मचारियों के काम के घंटे कई दूसरे कार्यालयी कर्मचारियों से ज्यादा होते हैं. ऐसे में उनके वेतन निर्धारण में इन अंतर को भी शामिल किया जाना चाहिए.
प्रमोशन को लेकर क्या है मांग?
IRTSA ने 8वें वेतन आयोग से न्यूनतम वेतन की गणना का तरीका बदलने की भी मांग की है. संगठन ने न्यूनतम वेतन 52,600 रुपए तय करने का प्रस्ताव दिया है. इसके लिए परिवार की जरूरतों की गणना में तीन के बजाय 4.6 उपभोग इकाइयों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है.
इसके अलावा, संगठन चाहता है कि बोतलबंद पीने के पानी, इंटरनेट और हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम जैसे खर्चों को भी न्यूनतम वेतन की गणना में शामिल किया जाए. प्रमोशन के मामले में भी IRTSA ने मांग रखी है कि प्रमोशनल इंक्रीमेंट दो सालाना इंक्रीमेंट के बराबर होना चाहिए. संगठन का मानना है कि कर्मचारियों की बढ़ती जिम्मेदारियों और महंगाई को देखते हुए वेतन और करियर में आगे बढ़ने के नियमों की समीक्षा जरूरी है.
कब लागू हो सकता है 8वां वेतन आयोग?
8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को हुआ था. आयोग को अपनी सिफारिशें तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है. इस हिसाब से इसकी रिपोर्ट मई 2027 के आसपास आने की उम्मीद है.
फिलहाल रेलवे सुपरवाइजर्स की मांगों पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है. इसलिए अभी ये कहना मुश्किल है कि सालाना इंक्रीमेंट 5% होगा या फिटमेंट फैक्टर 4.38 तक जाएगा. कर्मचारियों को इन बदलावों के लिए आयोग की अंतिम सिफारिशों और सरकार के फैसले का इंतजार करना होगा.
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