अगर आप सोना, चांदी या प्लैटिनम खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो ये खबर आपके लिए काफी ज्यादा जरूरी है. केंद्र सरकार ने इन कीमती धातुओं के आयात पर बैंकों और अधिकृत एजेंसियों को मिलने वाली एक खास टैक्स छूट आगे नहीं बढ़ाई है.
इसके बाद अब आयात के समय 3% इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (IGST) देना पड़ रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या आने वाले दिनों में सोने-चांदी के दाम और बढ़ेंगे और क्या इसका सीधा असर आम ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा?
सोना-चांदी के आयात पर क्या बदला?
अब तक बैंकों और कुछ अधिकृत एजेंसियों को विदेश से सोना, चांदी और प्लैटिनम मंगाने पर IGST का भुगतान पहले नहीं करना पड़ता था. सरकार ने इस छूट को आगे नहीं बढ़ाया. नतीजतन, 1 अप्रैल 2026 से इन आयातों पर 3% IGST लागू है.
राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव के मुताबिक, सरकार ने 8 अक्टूबर को जीएसटी काउंसिल को इस बदलाव की जानकारी दी. सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य अलग-अलग रास्तों से होने वाले कीमती धातुओं के आयात पर टैक्स के नियमों में समानता लाना है. यानी किसी एक आयात माध्यम को सिर्फ टैक्स व्यवस्था के कारण फायदा नहीं मिलना चाहिए.
क्या सोना-चांदी 3% महंगा हो जाएगा?
इस खबर के सामने आने के बाद ग्राहकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब सोना और चांदी खरीदने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे? इसका जवाब है कि जरूरी नहीं है. बैंकों को आयात के समय 3% IGST देना पड़ने का ये मतलब नहीं है कि बाजार में सोने और चांदी की कीमतें अपने आप 3% बढ़ जाएंगी. इसकी वजह ये है कि कारोबारियों को नियमों के अनुसार इनपुट टैक्स क्रेडिट के जरिए चुकाए गए टैक्स को समायोजित करने की सुविधा मिल सकती है.
हालांकि, आयात के समय टैक्स का भुगतान करने के लिए बैंकों और आयातकों को पहले से ज्यादा रकम की व्यवस्था करनी पड़ती है. इससे उनकी नकदी पर दबाव पड़ सकता है और वित्तीय लागत बढ़ सकती है. अगर कारोबारियों का खर्च बढ़ता है तो उसका कुछ असर सप्लाई चेन और ज्वेलर्स तक पहुंच सकता है. लेकिन कीमत कितनी बदलेगी ये कई बातों पर निर्भर करेगा.
सोने की कीमत किन बातों पर निर्भर करेगी?
1. अंतरराष्ट्रीय बाजार- दुनिया में सोने और चांदी की कीमत बढ़ने या घटने का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ता है.
2. डॉलर के मुकाबले रुपया- रुपये में कमजोरी आने पर विदेश से धातुएं खरीदना महंगा हो सकता है.
3. आयात शुल्क: कस्टम ड्यूटी और दूसरे लागू कर भी कीमतों को प्रभावित करते हैं.
4. कारोबार की लागत: आयात, वित्तीय व्यवस्था, परिवहन और ज्वेलरी बनाने का खर्च भी आखिरी कीमत में जुड़ सकता है.
लोगों को अभी क्या करना चाहिए?
अगर आप शादी, त्योहार या निवेश के लिए सोना-चांदी खरीदना चाहते हैं, तो खरीदारी से पहले अपने शहर के ताजा भाव जरूर जांचें. अलग-अलग ज्वेलर्स के मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्कों की तुलना करना भी फायदेमंद हो सकता है.
साथ ही खरीदारी के समय पक्का बिल जरूर लें. बिल में धातु की शुद्धता, वजन, कीमत और लागू टैक्स की जानकारी जांचें.