तानों से मेडिकल कॉलेज तक का सफर, कौन हैं भारत की पहली ट्रांसजेंडर डॉक्टर?


उन्होंने न सिर्फ एमबीबीएस की डिग्री हासिल की बल्कि कानूनी लड़ाई लड़कर मेडिकल में पोस्ट ग्रेजुएशन में एडमिशन भी लिया. 2026 में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अब वह हैदराबाद के ईसीआई हॉस्पिटल में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर के रूप में काम कर रही है. उन्हें भारत की पहली खुले तौर पर ट्रांसजेंडर पोस्ट ग्रेजुएट डॉक्टर के रूप में पहचान मिली है.

उन्होंने न सिर्फ एमबीबीएस की डिग्री हासिल की बल्कि कानूनी लड़ाई लड़कर मेडिकल में पोस्ट ग्रेजुएशन में एडमिशन भी लिया. 2026 में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अब वह हैदराबाद के ईसीआई हॉस्पिटल में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर के रूप में काम कर रही है. उन्हें भारत की पहली खुले तौर पर ट्रांसजेंडर पोस्ट ग्रेजुएट डॉक्टर के रूप में पहचान मिली है.

डॉक्टर कोय्याला रूथ जॉन पॉल तेलंगाना के खम्मम जिले के रहने वाली है. उन्हें कम उम्र में ही अपनी जेंडर आईडेंटिटी का एहसास हो गया था. हालांकि अपनी पहचान को एक्सेप्ट करने के बाद उन्हें परिवार और समाज की ओर से विरोध का सामना करना पड़ा. इस वजह से उनकी जिंदगी में आर्थिक परेशानियां भी आई. पढ़ाई जारी रखने के लिए उन्हें कहीं मुश्किलों से गुजरना पड़ा, लेकिन उन्होंने मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाने का अपना सपना नहीं छोड़ा.

डॉक्टर कोय्याला रूथ जॉन पॉल तेलंगाना के खम्मम जिले के रहने वाली है. उन्हें कम उम्र में ही अपनी जेंडर आईडेंटिटी का एहसास हो गया था. हालांकि अपनी पहचान को एक्सेप्ट करने के बाद उन्हें परिवार और समाज की ओर से विरोध का सामना करना पड़ा. इस वजह से उनकी जिंदगी में आर्थिक परेशानियां भी आई. पढ़ाई जारी रखने के लिए उन्हें कहीं मुश्किलों से गुजरना पड़ा, लेकिन उन्होंने मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाने का अपना सपना नहीं छोड़ा.

रूथ ने 2018 में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद नौकरी की तलाश में उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ा. रिपोर्ट्स के अनुसार हैदराबाद के 15 प्राइवेट अस्पताल ने उनकी जेंडर आईडेंटिटी के कारण उन्हें नौकरी देने से मना कर दिया था. हालांकि 2022 की आखिर में रूथ और डॉक्टर प्राची राठौर को हैदराबाद के उस्मानिया जनरल हॉस्पिटल में मेडिकल ऑफिसर के तौर पर नियुक्त किया गया. इसके साथ ही वे तेलंगाना में सरकारी सेवा में शामिल होने वाली पहली ट्रांसजेंडर डॉक्टरों में शामिल हुई.

रूथ ने 2018 में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद नौकरी की तलाश में उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ा. रिपोर्ट्स के अनुसार हैदराबाद के 15 प्राइवेट अस्पताल ने उनकी जेंडर आईडेंटिटी के कारण उन्हें नौकरी देने से मना कर दिया था. हालांकि 2022 की आखिर में रूथ और डॉक्टर प्राची राठौर को हैदराबाद के उस्मानिया जनरल हॉस्पिटल में मेडिकल ऑफिसर के तौर पर नियुक्त किया गया. इसके साथ ही वे तेलंगाना में सरकारी सेवा में शामिल होने वाली पहली ट्रांसजेंडर डॉक्टरों में शामिल हुई.

एमबीबीएस के बाद रूथ मेडिकल में एक्सपर्टीज हासिल करना चाहती थी. इसके लिए उन्होंने नीट पीजी परीक्षा दी और पीएचडी की पढ़ाई में एडमिशन लेने की कोशिश की. लेकिन काउंसलिंग के दौरान ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों की पहचान और आरक्षण से जुड़े स्पष्ट नियम नहीं होने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा.

एमबीबीएस के बाद रूथ मेडिकल में एक्सपर्टीज हासिल करना चाहती थी. इसके लिए उन्होंने नीट पीजी परीक्षा दी और पीएचडी की पढ़ाई में एडमिशन लेने की कोशिश की. लेकिन काउंसलिंग के दौरान ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों की पहचान और आरक्षण से जुड़े स्पष्ट नियम नहीं होने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा.

रूथ ने नीट पीजी 2023 में 800 में से 291 अंक हासिल किए थे. उन्होंने अनुसूचित जाति वर्ग की उम्मीदवार के रूप में आवेदन किया था और काउंसलिंग में थर्ड जेंडर कैटेगरी के तहत रजिस्ट्रेशन कराया था, हालांकि काउंसलिंग पोर्टल पर उनकी पहचान को महिला कैटेगरी में दर्ज कर दिया गया. प्रशासनिक स्तर पर समस्या का समाधान नहीं होने के बाद उन्होंने तेलंगाना हाई कोर्ट का रूख किया.

रूथ ने नीट पीजी 2023 में 800 में से 291 अंक हासिल किए थे. उन्होंने अनुसूचित जाति वर्ग की उम्मीदवार के रूप में आवेदन किया था और काउंसलिंग में थर्ड जेंडर कैटेगरी के तहत रजिस्ट्रेशन कराया था, हालांकि काउंसलिंग पोर्टल पर उनकी पहचान को महिला कैटेगरी में दर्ज कर दिया गया. प्रशासनिक स्तर पर समस्या का समाधान नहीं होने के बाद उन्होंने तेलंगाना हाई कोर्ट का रूख किया.

उनकी कानूनी लड़ाई का मुख्य मुद्दा मेडिकल एडमिशन में ट्रांसजेंडर पहचान को मान्यता देना और आरक्षण का लाभ दिलाना था. अदालत में उनके पक्ष की ओर से 2014 के नालसा फैसले का भी हवाला दिया गया, जिसमें ट्रांसजेंडर लोगों के अधिकारों और उनकी पहचान को मान्यता देने से जुड़े निर्देश दिए गए थे.

उनकी कानूनी लड़ाई का मुख्य मुद्दा मेडिकल एडमिशन में ट्रांसजेंडर पहचान को मान्यता देना और आरक्षण का लाभ दिलाना था. अदालत में उनके पक्ष की ओर से 2014 के नालसा फैसले का भी हवाला दिया गया, जिसमें ट्रांसजेंडर लोगों के अधिकारों और उनकी पहचान को मान्यता देने से जुड़े निर्देश दिए गए थे.

अगस्त 2023 में काउंसलिंग के दौरान फिर समस्या आने पर रूथ ने अदालत में और अवमानना की कार्रवाही शुरू की. इसके बाद हाईकोर्ट में अधिकारियों को निर्देश दिया कि उन्हें योग्यता अनुसार मेडिकल पीजी किसी आवंटित की जाए. तेलंगाना हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद रूथ को हैदराबाद ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज में एमडी एमरजेंसी मेडिसिन की सीट मिली. उन्होंने 21 अगस्त 2023 को इस कोर्स में एडमिशन लिया और अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई शुरू की.

अगस्त 2023 में काउंसलिंग के दौरान फिर समस्या आने पर रूथ ने अदालत में और अवमानना की कार्रवाही शुरू की. इसके बाद हाईकोर्ट में अधिकारियों को निर्देश दिया कि उन्हें योग्यता अनुसार मेडिकल पीजी किसी आवंटित की जाए. तेलंगाना हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद रूथ को हैदराबाद ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज में एमडी एमरजेंसी मेडिसिन की सीट मिली. उन्होंने 21 अगस्त 2023 को इस कोर्स में एडमिशन लिया और अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई शुरू की.

Published at : 14 Oct 2026 10:20 AM (IST)

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