GST काउंसिल में UPI MDR पर भी हुआ विचार, ट्रांजैक्शन पर राहत देगी सरकार?

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आज 8 अक्टूबर गुरुवार को GST काउंसिल की 57वीं बैठक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित की गई. इस बैठक में कई अहम फैसले भी लिए गए. सूत्रों के मुताबिक, जीएसटी काउंसिल ने यूपीआई MDR यानी Merchant Discount Rate पर लगने वाले जीएसटी को कम करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा की है. 

जानकारी के मुताबिक, कई राज्यों ने यूपीआई MDR पर लगने वाले 18 प्रतिशत जीएसटी को लेकर चिंता व्यक्त की है. नए MDR नियमों में 2000 से ज्यादा की यूपीआई से पेमेंट करने पर कुछ चुनिंदा मर्चेंट पर चार्ज लग सकता है. यही कारण है कि जीएसटी को कम करने को लेकर चर्चा हुई. ऐसे में अहम सवाल ये है कि MDR पर जो 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है, उसे कितना घटाने की मांग की जा रही है?

18 प्रतिशत GST घटाने का प्रस्ताव 

बता दें कि फिलहाल MDR पर 18 प्रतिशत GST लगता है, जिसे घटाकर 5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है. लेकिन एक बात का ध्यान रखें, इस पर फिलहाल अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है.

कैसे मिल सकती है मर्चेंट्स को राहत?

बड़ी बात ये है कि जो MDR पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है तो जीएसटी रजिस्टर्ड कारोबारी इस टैक्स का ITC (इनपुट टैक्स क्रेडिट) ले सकते हैं, लेकिन ऐसे कारोबारी जो ITC नहीं ले सकते हैं तो ये उनके लिए एक्स्ट्रा खर्च बन जाता है. यही कारण है कि GST 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करना का प्रस्ताव है. अगर 5 प्रतिशत जीएसटी कर दिया जाता है तो जो कारोबारी ITC नहीं ले सकते उनका टैक्स खर्च कम हो सकता है. 

नया फ्रेमवर्क क्या है?

नए यूपीआई फ्रेमवर्क में 2000 से ज्यादा की यूपीआई से पेमेंट करने पर 0.4 प्रतिशत का MDR लगाने का प्रावधान है. लेकिन ये चार्ज पर्सन टू पर्सन नहीं लगेगा. यानी अगर आप 2000 से ज्यादा की पेमेंट अपने परिवार को कर रहे हैं या दोस्त को तो इसपर कोई भी एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लागू होगा. चाहे आप 2000 से ज्यादा की ही नहीं, बल्कि 50, 000 की ट्राजैंक्शन करते हैं, तभी भी कोई चार्ज नहीं लगेगा.

वहीं अगर आप किसी दुकान पर जाकर 2000 से ज्यादा का सामान खरीदते हैं तो उसपर चार्ज लागू किया जाएगा, लेकिन वो चार्ज आपको नहीं देना होगा, बल्कि मर्चेंट को देना होगा. यानी ग्राहक को किसी भी तरह का कोई चार्ज नहीं देना होगा, उसे केवल सामान जितने का खरीदा है, उसकी पेमेंट करनी होगी. 

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