दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों का असर अब कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है. त्योहारों का सीजन होने के कारण बाजारों में खरीदारों की भीड़ बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन प्रदर्शन और आवाजाही में आ रही दिक्कतों ने व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है. चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के मुताबिक, पिछले तीन दिनों में दिल्ली का कारोबार सामान्य स्तर के मुकाबले घटकर सिर्फ 30 प्रतिशत रह गया है. व्यापारियों को करीब 2,000 करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान है.
दिल्ली के जंतर-मंतर और मध्य दिल्ली के दूसरे इलाकों में विरोध प्रदर्शनों के कारण बाजारों तक पहुंचने में लोगों को परेशानी हो रही है. इसका असर सिर्फ बड़े बाजारों पर ही नहीं, बल्कि उन कारोबारियों पर भी पड़ रहा है, जो त्योहारों से पहले होने वाली खरीदारी के भरोसे रहते हैं.
विरोध प्रदर्शन से क्या हुआ असर?
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष बृजेश गोयल के मुताबिक, दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के चलते करीब 15 लाख व्यापारियों के कारोबार पर सीधा असर पड़ रहा है. त्योहारों से पहले आमतौर पर बाजारों में खरीदारी बढ़ जाती है. ऐसे समय में ग्राहकों की संख्या कम होने से दुकानदारों की बिक्री प्रभावित हो रही है.
दिल्ली के बाजारों में कपड़े, जूते, इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू सामान, गिफ्ट आइटम और त्योहारों से जुड़ी दूसरी चीजों की अच्छी मांग रहती है. लेकिन जब लोग बाजार तक पहुंचने से बचते हैं, तो इन सभी इलाकों के कारोबार पर असर पड़ता है.
कितना गिरा दिल्ली का कारोबार?
CTI के मुताबिक, पिछले तीन दिनों में दिल्ली का टोटल व्यापार घटकर करीब 30 प्रतिशत रह गया है. इसका मतलब है कि कारोबार में लगभग 70 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है.
त्योहारों के दौरान बाजारों में होने वाली बिक्री व्यापारियों के लिए काफी अहम होती है. इसी समय दुकानदार ज्यादा स्टॉक रखते हैं और कर्मचारियों से लेकर दूसरे खर्चों की भी तैयारी करते हैं. ऐसे में बिक्री कम रहने से उनकी कमाई पर असर पड़ता है, जबकि दुकान का किराया, कर्मचारियों की सैलरी और दूसरे खर्च जारी रहते हैं.
बाहर से खरीदारी करने आने वाले ग्राहक घटे
दिल्ली के बाजारों में दूसरे शहरों से भी बड़ी संख्या में लोग खरीदारी करने आते हैं. खासकर त्योहारों के समय थोक और खुदरा बाजारों में बाहर से आने वाले ग्राहकों की संख्या बढ़ जाती है.
लेकिन व्यापारियों के मुताबिक, विरोध प्रदर्शनों के चलते बाहर से खरीदारी करने आने वाले लोगों की संख्या में बड़ी गिरावट आई है. पहले जहां रोजाना करीब 2 से 3 लाख लोग खरीदारी के लिए आते थे, वहीं अब ये संख्या घटकर लगभग 40 से 50 हजार रह गई है. ग्राहकों की संख्या कम होने से दुकानों की बिक्री के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट, होटल, रेहड़ी-पटरी और खाने-पीने के कारोबार पर भी असर पड़ सकता है. बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही कम रहने से कई छोटे कारोबारियों की कमाई भी कम हो जाती है.
मेट्रो स्टेशन बंद होने से परेशानी
दिल्ली में बाजारों तक पहुंचने के लिए बड़ी संख्या में लोग मेट्रो का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में मेट्रो स्टेशनों के बार-बार बंद होने से स्थानीय खरीदारों की संख्या भी कम हुई है. CTI के मुताबिक, मेट्रो से जुड़ी इन परेशानियों के कारण बाजारों में आने वाले स्थानीय ग्राहकों की संख्या आधी से भी ज्यादा कम हो गई है. इससे उन बाजारों पर खास असर पड़ा है, जहां लोग खरीदारी के लिए मेट्रो से पहुंचते हैं.
जब बाजारों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है, तो कई लोग अपनी खरीदारी टाल देते हैं या ऑनलाइन सामान खरीदने का ऑप्शन चुनते हैं. इससे दुकानदारों को त्योहारों के दौरान मिलने वाली बिक्री का नुकसान हो सकता है.
व्यापारियों को कितना हुआ नुकसान?
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष बृजेश गोयल ने अनुमान जताया है कि विरोध प्रदर्शनों के कारण दिल्ली के व्यापारियों को करीब 2,000 करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है. त्योहारों से पहले बाजारों में कारोबार कमजोर रहने से व्यापारियों को दोहरी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. एक ओर बिक्री घट रही है, वहीं दूसरी ओर दुकान चलाने के खर्च कम नहीं होते. अगर बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही जल्द ही नॉर्मल नहीं होती है तो त्योहारों से पहले होने वाली खरीदारी पर और असर पड़ सकता है.
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