कम निवेश में अपना काम शुरू करने का सपना देखने वालों के लिए एक कॉफी स्टॉल का प्रयोग चर्चा का विषय बन गया है. एक कंटेंट क्रिएटर ने कॉर्पोरेट ऑफिस के बाहर महज 40 रुपये प्रति कप की कीमत पर कॉफी बेचने का फैसला किया.
दिनभर ग्राहकों की आवाजाही के बीच उसने दावा किया कि कुल 450 कप कॉफी बिक गईं और बिक्री का आंकड़ा 18 हजार तक पहुंच गया. हालांकि, इस रकम को मुनाफा समझना सही नहीं होगा. आखिर कैसे चला यह छोटा-सा स्टॉल और क्या इससे हर दिन इतनी कमाई संभव है?
सुबह 10 बजे शुरू हुआ कॉफी का कारोबार
कंटेंट क्रिएटर देवांश त्यागी ने यह प्रयोग करके जानने की कोशिश की कि ऑफिस जाने वाले लोगों को कॉफी बेचकर एक दिन में कितनी कमाई हो सकती है. इसके लिए उन्होंने कॉर्पोरेट ऑफिस के बाहर अस्थायी स्टॉल लगाया. उन्होंने कॉफी तैयार करने के लिए दूध, इंस्टेंट कॉफी, गैस स्टोव, कप और अन्य जरूरी सामान जुटाया.
ग्राहकों को कैफे जैसा अनुभव देने के लिए कॉफी में चार अलग-अलग फ्लेवर भी शामिल किए गए. हर कप की कीमत 40 रुपये रखी गई और सुबह करीब 10 बजे बिक्री शुरू हुई.
ऑफिस ब्रेक में बढ़ी ग्राहकों की भीड़
सुबह कर्मचारियों के ब्रेक के दौरान स्टॉल पर ग्राहक आने लगे. देवांश ने कॉफी बेचने के साथ लोगों से उसके स्वाद का फीडबैक भी लिया. उनके मुताबिक, शुरुआती दो घंटों में करीब 40 कप कॉफी बिक गईं.
दोपहर में बिक्री की रफ्तार कुछ धीमी रही, लेकिन शाम होते ही एक बार फिर ग्राहकों की संख्या बढ़ने लगी. ऑर्डर तेजी से मिलने पर उन्हें कॉफी तैयार करने और ग्राहकों को देने की गति बढ़ानी पड़ी. आखिरकार उनके मुताबिक, कॉफी का स्टॉक खत्म हो गया.
450 कप की बिक्री से कैसे बने 18 हजार?
देवांश के दावे के अनुसार, पूरे दिन में 450 कप कॉफी बिकी. एक कप की कीमत 40 रुपये होने पर कुल बिक्री का हिसाब इस तरह बनता है:
450 कप × ₹40 = ₹18,000
हालांकि, यह कुल बिक्री यानी रेवेन्यू है, शुद्ध मुनाफा नहीं. कॉफी, दूध, फ्लेवर, कप, गैस और अन्य सामान पर हुए खर्च को घटाने के बाद ही वास्तविक कमाई का पता चल सकता है. इस प्रयोग में खर्चों का पूरा ब्योरा सामने नहीं आया है.
क्या हर दिन इतनी कमाई संभव है?
इस प्रयोग को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं मिली-जुली रहीं. कुछ लोगों ने बिक्री के आंकड़े पर सवाल उठाए, जबकि अन्य ने इसे छोटे कारोबार के अवसर के रूप में देखा. एक दिन की बिक्री के आधार पर रोजाना इतनी कमाई होने का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है. ग्राहकों की संख्या, लोकेशन, खर्च और प्रतिस्पर्धा जैसे कारक किसी भी छोटे कारोबार की सफलता तय करते हैं.
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