57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में लिए गए फैसलों का कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने स्वागत किया है. कैट के राष्ट्रीय महामंत्री और चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि इन निर्णयों से छोटे व्यापारियों, खुदरा कारोबारियों, एमएसएमई और स्टार्टअप्स को राहत मिलेगी. उन्होंने कहा कि, सरकार के इन कदमों से कारोबार में अनावश्यक कानूनी दबाव घटेगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी.
जीएसटी के कानूनी प्रावधानों में बदलाव से व्यापारियों को राहत
खंडेलवाल ने जीएसटी से जुड़े गिरफ्तारी प्रावधानों को हटाने, अभियोजन की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने और सामान्य दंड को 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये करने के फैसलों को अहम बताया. उन्होंने कहा कि इन बदलावों से छोटे व्यापारियों के मन में लंबे समय से बनी कानूनी कार्रवाई की आशंका कम होगी. उनका मानना है कि कर व्यवस्था में भरोसा बढ़ने से ईमानदारी से कारोबार करने वालों को राहत मिलेगी. साथ ही, अनावश्यक कानूनी उलझनों में समय और संसाधन खर्च करने के बजाय व्यापारी अपने व्यवसाय पर अधिक ध्यान दे सकेंगे.
सालाना रिटर्न और तिमाही भुगतान से घटेगा अनुपालन का बोझ
पांच करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वाले छोटे व्यापारियों के लिए प्रस्तावित वार्षिक रिटर्न और तिमाही कर भुगतान व्यवस्था का भी खंडेलवाल ने स्वागत किया. उन्होंने इसे जीएसटी लागू होने के बाद छोटे कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण सुधारों में से एक बताया. उन्होंने कहा कि, बार-बार रिटर्न दाखिल करने और जटिल प्रक्रियाओं को पूरा करने में छोटे कारोबारियों का काफी समय खर्च होता है. नई व्यवस्था से यह बोझ कम होने की उम्मीद है. इससे समय और संसाधनों की बचत होगी तथा कारोबारियों को अपने व्यापार के विस्तार पर ध्यान देने का अवसर मिलेगा.
ई-कॉमर्स के जरिए दूसरे राज्यों तक पहुंचेगा छोटे दुकानदारों का कारोबार
जीएसटी परिषद के फैसलों में छोटे विक्रेताओं को विभिन्न राज्यों में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से कारोबार करने की सुविधा भी शामिल है. खंडेलवाल के अनुसार, इससे छोटे दुकानदारों के साथ घरेलू उद्योगों, कारीगरों, महिला उद्यमियों और ग्रामीण कारोबारियों के लिए नए बाजार खुल सकते हैं. अब छोटे विक्रेताओं के लिए अपने स्थानीय बाजार से बाहर निकलकर देशभर के ग्राहकों तक पहुंच बनाने के अवसर बढ़ेंगे. इससे उनकी बिक्री, आय और कारोबारी पहुंच का विस्तार हो सकता है.
छोटे और मध्यम कारोबारियों के लिए रिफंड प्रक्रिया में तेजी को भी अहम माना जा रहा है. खंडेलवाल ने 90 प्रतिशत पात्र रिफंड दावों का तीन कार्य दिवसों के भीतर स्वतः निपटान करने और रिफंड आवेदन की स्वीकृति अवधि 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने के फैसले का स्वागत किया. रिफंड में देरी होने पर व्यापारियों की कार्यशील पूंजी लंबे समय तक अटकी रहती है, जिससे रोजमर्रा के खर्च और कारोबार चलाने में परेशानी हो सकती है.
माल परिवहन में अनावश्यक जांच पर लगेगी रोक
वहीं, वाहनों की जांच को विशिष्ट खुफिया सूचना और पूर्व अनुमति तक सीमित करने के फैसले को भी उन्होंने व्यापार के लिहाज से सकारात्मक बताया. उनके अनुसार, इससे माल ढुलाई के दौरान होने वाली अनावश्यक रुकावटें कम होंगी. परिवहन में लगने वाला अतिरिक्त समय घटने से व्यापारियों को लॉजिस्टिक्स के स्तर पर राहत मिल सकती है. माल की आवाजाही अधिक सुचारु होने से कारोबारी गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है.
बीमा, टेलीकॉम और मशीनरी से जुड़े फैसले भी अहम
खंडेलवाल ने कर्मचारी स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा, टेलीकॉम टावर, पाइपलाइन तथा प्लांट और मशीनरी पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) और रिफंड से संबंधित निर्णयों को भी उद्योग एवं व्यापार जगत के लिए सकारात्मक बताया. उनके अनुसार, इन कदमों से निवेश को प्रोत्साहन मिल सकता है और कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है.
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और जीएसटी परिषद के सभी सदस्यों को फैसलों के लिए बधाई दी. खंडेलवाल ने कहा कि 57वीं जीएसटी परिषद के निर्णय छोटे व्यापारियों को आर्थिक विकास की मुख्यधारा में अधिक सशक्त बनाने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं. उनके मुताबिक, इन बदलावों से देश में कारोबार करना अधिक सरल, पारदर्शी और व्यापारी-अनुकूल बनाने की कोशिश को बल मिलेगा.
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