आज की तारीख में बैंक में हर व्यक्ति पैसे जमा करवाता है, ताकि उसके पैसे सेव रहे और जरूरत पड़ने पर बैंक से लोन और एफडी जैसी सुविधा भी ले सके. लेकिन सोचिए, जिस बैंक में आप अपने पैसे ये सोचकर जमा करवा रहे हैं कि वहां पैसे सुरक्षित रहेंगे, लेकिन अगर बैंक ही अपने जरूरी नियमों का ठीक से पालन न करें तो ऐसी स्थिति में मामला गंभीर हो जाता है.
ऐसा ही एक मामला अमेरिका से सामने आया है, यहां बैंक ऑफ अमेरिका पर 1.2 अरब डॉलर का भारी जुर्माना लगाया गया है. ऐसे में सबसे पहले जानते हैं कि आखिर पूरा मामला क्या है और देश के दूसरे सबसे बड़े बैंक पर इतना जुर्माना क्यों लगाया गया है?
क्यों लगा जुर्माना?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतने बड़े बैंक पर इतना भारी जुर्माना लगाया गया है और जुर्माना लगाया किसने है? जानकारी के मुताबिक, बैंक पर आरोप है कि वह मनी लॉन्ड्रिंग रोकने में पूरी तरह से नाकाम रहा है. इतना ही नहीं, बल्कि इसके साथ ही बैंक ने जरूरी नियमों का भी पालन नहीं किया.
बैकों को संदिग्ध पैसों के लेनदेन पर नजर रखनी होती है और अगर किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी मिलती है तो इसकी जानकारी समय पर आधिकारियों को देनी होती है. लेकिन यहां मामला बिल्कुल अलग है. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, बैंक ने समय पर 5 अरब डॉलर से ज्यादा के संदिग्ध लेने की जानकारी नहीं दी.
अवैध पैसों के लेनदेन का भी जिक्र
इसके अलावा इस मामले में चीनी मनी लॉड्रिंग नेटवर्क और अमेरिका की दक्षिण-पश्चिमी सीमा से जुड़े अवैध पैसों के लेनदेन के जोखिमों का भी जिक्र किया गया है. इस मामले में आधिकारियों का आरोप है कि बैंक जोखिमों को रोकने में पूरी तरह नाकाम रहा और बैंक ने इससे जुड़ी जानकारी भी नहीं दी.
किसने लगाया जुर्माना?
अहम सवाल यही है कि बैंक पर जुर्माना किसने लगाया है तो बैंक पर अमेरिकी वित्तीय अपराध प्रवर्तन नेटवर्क यानी FinCEN ने बैंक पर 1.2 अरब डॉलर का जुर्माना लगाया है. अमेरिकी वित्त मंत्रालय के मुताबिक, बड़ी बात ये है कि बैंक 1970 में बने सीक्रेसी एक्ट का जानबूझकर उल्लंघन करने की बात को स्वीकार किया है.
75 करोड़ डॉलर OCC को दिए जाएंगे
बता दें कि जो बैंक पर 1.2 अरब डॉलर का जुर्माना लगाया गया है, उसमें से 75 करोड़ डॉलर अमेरिकी बैंकिंग नियामक OCC को दिए जाएंगे.
देश की सुरक्षा और पैसों के लेनदेन पर असर
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के मुताबिक, अगर कोई बड़ा बैंक ऐसा करता है तो इससे देश की सुरक्षा और पैसों के लेनदेन की व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है.
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