बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता पंकज त्रिपाठी अपनी पत्नी मृदुला त्रिपाठी और परिवार के साथ नवरात्री और दुश्शेरा बनाने उस जगह पहुंचे जिसे वह अपना दूसरा घर मानते है. इस दौरान पंकज त्रिपाठी ने कोलकाता की समृद्ध संस्कृति और त्योहारों की परंपराओं को करीब से महसूस किया.
कोलकाता से खास रिश्ता
इस बार अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने अपने परिवार के साथ कोलकाता में दुर्गा अष्टमी और दशहरा मनाया. काफी समय के बाद पंकज त्रिपाठी ने इस शहर में अपने परिवार के साथ त्यौहार बनाया. पंकज का कोलकाता से काफी गहरा भावनात्मक जुड़ाव रहा है. इस शहर से उनका रिश्ता सिर्फ यहां की संस्कृति और दुर्गा पूजा की भव्यता तक सीमित नहीं है बल्कि कोलकाता उनकी पत्नी मृदुला त्रिपाठी का मायका भी है, इसलिए यह शहर उनके परिवार और निजी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है.

पंकज बहुत सालो से अपनी पत्नी के साथ सालो से यहाँ आते रहते है और अपने ससुराल वालों के साथ समय बिताते हैं और शहर की खासियत, परंपराओं और अपनापन महसूस करते हैं. कोलकाता से उनके इसी लगाव और बार-बार यहां आने की वजह से लोग उन्हें प्यार से कोलकाता का ‘दामाद’ भी कहते हैं. इस साल त्योहारों के मौके पर पंकज ने कोलकाता में ही नवरात्रि और दशहरे का जश्न मनाने का फैसला किया और अपने परिवार के साथ दुर्गाष्टमी का पावन त्योहार मनाया.
पंकज के लिए त्योहार का मतलब सिर्फ पूजा-पाठ और जश्न तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये परिवार के साथ समय बिताने, अपनेपन को महसूस करने और उन सांस्कृतिक रिश्तों को संजोने का भी मौका हैं, जो उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं. दुर्गा पूजा की भव्यता, मां दुर्गा के प्रति लोगों की श्रद्धा और पूरे कोलकाता में छाई त्योहारों की रौनक उनके दिल में एक खास जगह रखती है. इस साल शहर में परिवार के साथ त्योहार मनाने से यह मौका उनके लिए और भी खास बन गया. उन्हें कोलकाता की परंपराओं और उत्सवों का आनंद लेने के साथ परिवार के साथ नई यादें बनाने का भी मौका मिला.
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दुर्गा पूजा की खासियत
पंकज त्रिपाठी कोलकाता के प्रति अपने प्यार और यहां त्योहार मनाने के महत्व के बारे में बात करते हुए कहते हैं की “कोलकाता हमेशा से मेरे दिल के बहुत करीब रहा है. इस शहर से मेरा रिश्ता मृदुला और उनके परिवार के ज़रिए जुड़ा, लेकिन समय के साथ कोलकाता मेरे लिए सिर्फ मेरा ससुराल नहीं रह गया है. अब यह ऐसा शहर बन गया है, जहां मुझे अपनेपन का एहसास होता है, जहां मैंने कई खूबसूरत यादें बनाई हैं और जहां लौटने का मैं हमेशा इंतज़ार करता हूं. लोग मुझे प्यार से कोलकाता का दामाद कहते हैं और मैं खुद को खुशकिस्मत मानता हूं कि इस शहर ने मुझे इतना प्यार दिया है.
”कोलकाता में कुछ तो खास और जादुई बात है, खासकर दुर्गा पूजा के दौरान. लोगों की श्रद्धा, उत्साह, खूबसूरत पंडाल, परंपराएं और जिस तरह सभी लोग मिलकर मां दुर्गा का स्वागत और पूजा करते हैं, वह अपने आप में बेहद ही खास है. इस दौरान आप कोलकाता की असली आत्मा को महसूस कर सकते हैं. मुझे बंगाल की संस्कृति और यहां की समृद्ध परंपराएं हमेशा से ही बहुत पसंद रही हैं. दुर्गाष्टमी के मौके पर अपने परिवार के साथ यहां होना इस त्योहार को और भी खास बना देता है.”
परिवार के साथ खास पल
”इस साल का त्योहार हमारे लिए इसलिए भी यादगार है, क्योंकि हम परिवार के साथ बहुत लंबे समय बाद कोलकाता में दशहरा मना रहे हैं. त्योहार हमें अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी में थोड़ा रुकने, अपनों के साथ अच्छा समय बिताने और उन चीजों से दोबारा जुड़ने का मौका देते हैं, जो वास्तव में हमारे लिए मायने रखती हैं. काम और व्यस्त दिनचर्या के बीच परिवार के साथ बिताए ऐसे पल बेहद कीमती होते हैं. मुझे खुशी है कि इस साल हम कोलकाता में एक साथ आ सके, दुर्गाष्टमी और दशहरा मना सके और एक बार फिर इस खूबसूरत शहर के प्यार और अपनापन को महसूस कर सके.”

त्योहारों का यह जश्न पंकज त्रिपाठी के कोलकाता के साथ गहरे रिश्ते और वहां की संस्कृति व पारिवारिक परंपराओं के प्रति उनके लगाव को दर्शाता है. अपने परिवार के साथ दुर्गा पूजा मनाने की खूबसूरत यादों के साथ पंकज उस शहर से अपने रिश्ते को और मजबूत कर रहे हैं, जो उनकी निजी जिंदगी का अहम हिस्सा भी बन चुका है.
पंकज त्रिपाठी के लिए कोलकाता अब सिर्फ एक शहर नहीं है, जहां वह अपने ससुराल वालों से मिलने आते हैं, बल्कि यह उनके लिए अपने घर लौटने जैसा एहसास है, जहां परिवार का प्यार, परंपराएं और अपनेपन की भावना एक साथ मिलती हैं.
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