आपके घर भी तो नहीं पहुंच रहा एक्सपायर्ड सामान? Zepto को FSSAI का नोटिस

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भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण – FSSAI ने खाने-पीने के सामान और हेल्थ सप्लीमेंट्स से जुड़े मामलों में चार कंपनियों को नोटिस जारी किया है. इनमें क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म Zepto, बेकलाइट फूड प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड, हेल्दीहे फूड्स LLP और BMS लाइफसाइंस शामिल हैं. 

किसी मामले में एक्सपायर्ड बेसन की डिलीवरी की शिकायत है तो कहीं प्रोडक्ट के नाम, पैकेजिंग और सेहत से जुड़े दावों पर सवाल उठाए गए हैं. FSSAI के मुताबिक कंपनियों से इन मामलों में जवाब मांगा गया है. फिलहाल ये नोटिस हैं अंतिम कार्रवाई या दोष साबित होने का फैसला नहीं.

Zepto पर एक्सपायर्ड बेसन की डिलीवरी का आरोप

Zepto के खिलाफ मामला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक ग्राहक की शिकायत से जुड़ा है. ग्राहक ने आरोप लगाया कि उसे बेसन के दो पैकेट ऐसे मिले जिनकी इस्तेमाल करने की तारीख निकल चुकी थी. FSSAI के नोटिस के मुताबिक दोनों पैकेट पर ‘USE BY: 12092026’ लिखा था यानी 12 सितंबर 2026. शिकायत सही पाए जाने पर इसका मतलब होगा कि ग्राहक को इस्तेमाल की तय तारीख बीतने के बाद बेसन डिलीवर किया गया.

FSSAI ने कंपनी को शिकायत की जांच करने और ऑर्डर, डिलीवरी, वेयरहाउस, विक्रेता और प्रोडक्ट से जुड़ी जानकारी देने का निर्देश दिया है. कंपनी को यह भी बताना होगा कि ऐसी स्थिति कैसे बनी और प्रभावित स्टॉक को हटाने, ग्राहकों को सूचना देने, रिफंड देने और दोबारा ऐसी गलती रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं. Zepto को इस मामले में लिखित जवाब देना होगा. नियमों का पालन नहीं करने पर खाद्य सुरक्षा कानून के तहत आगे कार्रवाई हो सकती है.

क्रीम रोल के नाम पर क्रीम को लेकर सवाल

दूसरा मामला ‘मालपानी बेक-लाइट पुनेरी क्रीम रोल (Malpani’s Bake-Lite Puneri Cream Roll)’ से जुड़ा है जिसे बेकलाइट फूड प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड बनाती है. FSSAI के मुताबिक, यह प्रोडक्ट Blinkit और Zepto जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बिक्री के लिए उपलब्ध था.

प्राधिकरण ने प्रोडक्ट के नाम और उसकी पैकेजिंग पर सवाल उठाए हैं. पैकेट पर इसे ‘क्रीम रोल (Cream Roll)’ और ‘कुरकुरा और मलाईदार (Crispy & Creamy)’ बताया गया था जबकि घोषित सामग्री में मैदा, हाइड्रोजनेटेड वेजिटेबल फैट, मार्जरीन और चीनी शामिल हैं.  लेबल पर दूध, मिल्क फैट या क्रीम जैसी डेयरी सामग्री का उल्लेख नहीं था.

FSSAI का कहना है कि क्रीम एक निर्धारित मानक वाला डेयरी उत्पाद है. ऐसे में वेजिटेबल फैट, मार्जरीन और चीनी से बनी फिलिंग को क्रीम के रूप में पेश करना ग्राहकों को भ्रमित कर सकता है. प्रोडक्ट के नाम, पैकेजिंग और विज्ञापन को लेकर कंपनी से जवाब मांगा गया है.

क्रैनबेरी कैप्सूल के दावों पर भी सवाल

HealthyHey Foods LLP को उसके ‘हेल्दीहे न्यूट्रिशन नेचुरल क्रैनबेरी एक्सट्रैक्ट 25% कैप्सूल’ को लेकर नोटिस जारी किया गया है. FSSAI के अनुसार, Flipkart और कंपनी की वेबसाइट पर उपलब्ध प्रोडक्ट के लेबल में फूड कलर की जानकारी में अंतर पाया गया.

इसके अलावा, ‘Supports Urinary Tract Health’ यानी यूरिनरी ट्रैक्ट की सेहत में मदद करने जैसे दावों पर भी सवाल उठाए गए. FSSAI ने इन्हें ऐसे स्वास्थ्य संबंधी दावों की श्रेणी में माना है जिनके लिए लागू नियमों के तहत पूर्व मंजूरी जरूरी हो सकती है.

प्राधिकरण ने पैकेट पर जरूरी जानकारी देने से जुड़े नियमों के उल्लंघन की बात भी कही है. विज्ञापनों में FSSAI के लोगो के साथ ‘FSSAI Certified’ और ‘High Level of Certification’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल को भ्रामक बताया गया. प्रोडक्ट के नाम में ‘नेचुरल’ और ‘100% नेचुरल’ जैसे दावों पर भी आपत्ति जताई गई है.

एक्सपायर रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पर बिक रहे थे क्रैनबेरी कैप्सूल?

BMS लाइफसाइंस को ‘हाओग्स क्रैनबेरी यूरिनरी ट्रैक्ट हेल्थ कैप्सूल’ के मामले में नोटिस मिला है. FSSAI के मुताबिक प्रोडक्ट की बिक्री और वितरण एक्सपायर हो चुके FSSAI रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के तहत किया जा रहा था. प्रोडक्ट और उसके विज्ञापनों में ‘Kidney Health’, यूरिन इन्फेक्शन से बचाव और उससे राहत जैसे दावे किए गए थे. इसके अलावा, स्किन, वजन घटाने, दांतों, दिल, किडनी और शरीर से टॉक्सिन निकालने जैसे फायदों से जुड़े दावों पर भी सवाल उठाए गए हैं.

FSSAI का कहना है कि ऐसे दावे उपभोक्ताओं को प्रोडक्ट के चिकित्सकीय या उपचार संबंधी फायदे होने का गलत संकेत दे सकते हैं. प्राधिकरण ने FSSAI के लोगो के इस्तेमाल और लेबल पर ‘स्वास्थ्य विशेषज्ञ के निर्देशानुसार इस्तेमाल करें (As directed by healthcare practitioner)’ लिखने पर भी आपत्ति जताई है. कंपनी को तय समय के भीतर अपना जवाब देने को कहा गया है.

अब कंपनियों को क्या करना होगा?

FSSAI ने चारों कंपनियों से संबंधित मामलों में जवाब और जरूरी जानकारी मांगी है. Zepto को डिलीवरी से जुड़े पूरे मामले की जांच करनी होगी जबकि बाकी कंपनियों को प्रोडक्ट की लेबलिंग, विज्ञापन और स्वास्थ्य संबंधी दावों पर अपना पक्ष रखना होगा. संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संबंधित खाद्य सुरक्षा कानूनों और नियमों के तहत आगे कार्रवाई की जा सकती है.

यहां ध्यान देने वाली बात है कि नोटिस जारी होने का मतलब यह नहीं है कि कंपनी पर अंतिम रूप से दोष साबित हो गया है. अभी कंपनियों का पक्ष और प्राधिकरण की आगे की कार्रवाई सामने आना बाकी है. 

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