- चीन ने जनवरी-अगस्त में 1000 टन सोना आयात किया.
- केंद्रीय बैंक लगातार 23 माह से सोना खरीद रहा.
- रूस के सबक से चीन डॉलर निर्भरता कम कर रहा.
चीन ने इस साल जनवरी से लेकर अगस्त के बीच 1,000 टन से ज्यादा सोने का आयात किया है, जिसकी कीमत रिकॉर्ड 158.8 बिलियन डॉलर थी. इससे पहले चीन ने साल 2025 में 886 टन सोने का आयात किया था, जिसकी कीमत 96.5 बिलियन डॉलर थी. इससे पता चलता है कि 2025 में साल भर में जितना सोना चीन ने खरीदा था, उतना इस साल चंद महीनों में ही खरीद डाला.
CNBC की डेटा के मुताबिक, पीपल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC) ने सितंबर में लगभग 23 टन सोना खरीदा, जो पिछले तीन सालों में किसी एक महीने में उसकी बड़ी खरीद थी. यह खरीद सेंट्रल बैंक की लगातार 23वें महीने की खरीदारी थी. चीन की सोने की इस खरीद में उछाल एक ऐसे वक्त पर आया है, जब भारत में सोने की मांग धनतेरस और दीवाली के चलते पहले ही ऊंचे स्तर पर रहती है.
क्यों इतना सोना जुटा रहा चीन?
CNBC की रिपोर्ट के मुताबिक, जूलियस बेयर ग्रुप के एनालिस्ट कार्स्टन मेनके का कहना है कि चीन का सोना खरीदना कुछ हद तक अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिशों का नतीजा है.
साल 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस के लगभग 300 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार को फ्रीज कर दिया था. इसके चलते रूस इस फ्रीज किए गए रकम का इस्तेमाल विदेशी कर्ज चुकाने या दूसरे देशों से जरूरी सामान मंगाने के लिए नहीं कर पा रहा था.
किसी देश की करेंसी को स्थिर रखने के लिए उस देश का केंद्रीय बैंक अपने यहां का फॉरेक्स रिजर्व का इस्तेमाल करता है. लेकिन फ्रीज कर देने से रूस का केंद्रीय बैंक अपनी करेंसी रूसी रूबल को बचाने के लिए बाजार में दखलअंदाजी नहीं कर सका.
नतीजतन, डॉलर के मुकाबले इसकी कीमत काफी ज्यादा गिर गई. इससे सबक लेते हुए चीन चीन डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए अमेरिकी बॉन्ड बेचकर तेजी से सोना जुटा रहा है क्योंकि ठोस सोने को डिजिटली फ्रीज नहीं किया जा सकता.
इतना ही नहीं, चीन ने अमेरिकी सरकारी कर्ज में अपनी हिस्सेदारी भी कम कर दी है। CNBC के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में अमेरिकी ट्रेजरी में उसकी हिस्सेदारी 18 साल के निचले स्तर 618 अरब डॉलर पर आ गई.
भारत पर असर
भारत में सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय दरों, करेंसी में उतार-चढ़ाव और घरेलू कारकों से प्रभावित होती हैं इसलिए हो सकता है कि त्योहारी सीजन में चीन की इस ताबड़तोड़ खरीदारी से देश में सोने की कीमतों में उछाल आए. हालांकि, इसकी कोई गारंटी नहीं है.
इस हफ्ते आने वाले अमेरिकी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के आंकड़े आने वाले हैं, जिससे फेडरल रिजर्व के नीतिगत रूख तय होगा.
अगर अमेरिका में महंगाई उम्मीद से ज्यादा मजबूत दिखती है, तो फेडरल रिजर्व को ब्याज दरें ऊंची बनाए रखने पर मजबूर होना पड़ेगा, जिससे आने वाले समय में सोने की कीमतें तय होने में मदद मिलेंगी.
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