गलती सुधारकर रिवाइज्ड ITR भरा तो लगी 3.99 लाख की पेनल्टी, फिर क्या हुआ?

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इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरते समय आय की सही जानकारी देना बेहद जरूरी है. अगर आय छिपाने या गलत जानकारी देने का मामला सामने आता है, तो आयकर विभाग भारी जुर्माना लगा सकता है. लेकिन राजस्थान के सीकर के एक करदाता को 3.99 लाख रुपये के जुर्माने से राहत मिली है. जयपुर स्थित आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने विभाग की कार्रवाई में कानूनी खामी पाए जाने के बाद जुर्माना रद्द कर दिया.

यह मामला आकलन साल 2018-19 से जुड़ा है. सीकर के एक व्यक्ति ने तय समय पर अपना इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं किया था. इसके बाद आयकर विभाग की ओर से नोटिस भेजे जाने पर उन्होंने अपनी आय 12.9 लाख रुपये घोषित करते हुए रिटर्न दाखिल किया.

आकलन अधिकारी का मानना था कि नोटिस जारी नहीं होता, तो यह आय टैक्स के दायरे में नहीं आती. इसके बाद आयकर अधिनियम की धारा 270A के तहत जुर्माने की कार्रवाई शुरू की गई.

कैसे लगा 3.99 लाख का जुर्माना?

अधिकारी ने करीब 1.99 लाख रुपये की टैक्स देनदारी के आधार पर लगभग 3.99 लाख का जुर्माना लगाया, यह टैक्स राशि का करीब 200 फीसदी था. बाद में आयकर आयुक्त (अपील) ने भी जुर्माने के फैसले को बरकरार रखा.

इसके बाद करदाता ने इस फैसले को जयपुर स्थित ITAT में चुनौती दी. मामले की सुनवाई के दौरान जुर्माना लगाने की प्रक्रिया में हुई कानूनी चूक अहम साबित हुई.

ITAT ने क्यों रद्द किया जुर्माना?

न्यायाधिकरण ने पाया कि आयकर विभाग के आकलन आदेश और जुर्माने के नोटिस में यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि धारा 270A(9) के किस विशेष प्रावधान के तहत करदाता पर गलत रिपोर्टिंग का आरोप लगाया जा रहा है.

न्यायाधिकरण के मुताबिक, जब किसी व्यक्ति पर जुर्माने की कार्रवाई की जाती है, तो उसे यह स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए कि उस पर किस कानूनी आधार पर आरोप लगाया गया है. ऐसा न होने से वह अपना पक्ष ठीक से नहीं रख पाता. इसी तकनीकी और कानूनी खामी के आधार पर ITAT ने 23 सितंबर 2026 को जुर्माना रद्द कर दिया.

करदाताओं के लिए क्या है इसका मतलब?

आयकर कानून की धारा 270A के तहत सामान्य अंडर-रिपोर्टिंग पर संबंधित टैक्स का 50 फीसदी जुर्माना लग सकता है, जबकि निर्धारित परिस्थितियों में गलत रिपोर्टिंग के लिए यह 200 फीसदी तक हो सकता है.

हालांकि, इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि ITR दाखिल न करने या आय कम दिखाने पर हर व्यक्ति का जुर्माना रद्द हो जाएगा. यह राहत मामले में नोटिस और कानूनी प्रक्रिया की खामियों के कारण मिली है. इसलिए करदाताओं को समय पर रिटर्न दाखिल करना चाहिए और आय की सही जानकारी देनी चाहिए.

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