पिछले कई दिनों से टाटा समूह में जो भी बवाल चल रहा है, वो किसी से छुपा नहीं है. अब इस विवाद ने तमाम फैमिली बिजनेसेज को चिंता में डाल दिया है. ऐसा हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि ये कहना है RPG एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका का. हर्ष ने टाटा ग्रुप में चल रहे विवाद को लेकर चिंता जाहिर की है.
उनका कहना है कि इस विवाद के कारण देश के दूसरे बड़े कारोबारी घराने भी अपनी कंपनियों के बोर्ड में इंडिपेंडेंट निदेशकों की संख्या और भूमिका पर दोबारा विचार कर सकते हैं.
हर्ष ने किया पोस्ट
दरअसल मशहूर कारोबारी हर्ष गोयनका सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं. ऐसे में वो बिजनेस जगत में जो भी चल रहा है, या दुनियाभर में चलने वाले मामलों पर अपनी प्रतिक्रिया देते रहते हैं. अब हाल ही में हर्ष ने टाटा समूह में चल रहे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने अपने ऑफिशियल X (पहले ट्विटर) अकाउंट पर इसे लेकर एक पोस्ट शेयर किया है.
इस पोस्ट में उन्होंने लिखा, ‘टाटा ग्रुप समूह के घटनाक्रम ने भारतीय पारिवारिक कारोबारों में एक नई चिंता पैदा कर दी है. हाल ही में एक बड़े कारोबारी समूह ने अपनी सभी कंपनियों के बोर्ड की स्थिति की समीक्षा करने के लिए अपनी कानूनी टीम को बुलाया. टीम से ये चेक करने को कहा गया कि क्या बोर्ड में स्वतंत्र निदेशकों की संख्या जरूरत से ज्यादा हो गई है और क्या इसमें कोई बदलाव करने की जरूरत है.’
The Tata episode seems to have created a new anxiety in Indian family businesses. A very large business group recently called its legal team to check the composition of all its boards- whether independent directors had become too many, and whether something needed to be done. And this is a problematic trend. We want stronger governance, not fewer independent voices.
— Harsh Goenka (@hvgoenka) October 13, 2026
आगे हर्ष ने इस स्थिति को चिंताजनक बताते हुए लिखा, ‘ये एक चिंताजनक ट्रेंड है. हमें कंपनियों में बेहतर कामकाज और मजबूत व्यवस्था के लिए स्वतंत्र निदेशकों की भूमिका बढ़ानी चाहिए, न कि उनकी संख्या कम करनी चाहिए.’
क्या है टाटा ग्रुप का विवाद?
बता दें कि ये विवाद तब शुरू हुआ जब टाटा ग्रुप की बोर्ड मीटिंग में टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल को अगले पांच साल के लिए बढ़ाने की बात कही. 17 सितंबर को टाटा संस के बोर्ड ने उनके दोबारा नियुक्त होने को मंजूरी दी थी. हालांकि, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इसका विरोध किया. इसके बाद टाटा समूह में नियंत्रण और फैसले लेने के अधिकार को लेकर चर्चा तेज हो गई.
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