आज के समय में एआई पढ़ाई का एक जरूरी हिस्सा बन गया है. छात्र इसका इस्तेमाल जानकारी जुटाने, आर्टिकल तैयार कर,ने अलग-अलग विषयों को समझने और रिसर्च करने के लिए कर रहे हैं. इससे कई काम आसान हो जाते हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या एआई पर निर्भरता बच्चों की सोचने, याद रखना और किस विषय को समझने की क्षमता को कमजोर कर सकती है. क्या तैयार जवाब मिलने से बच्चे खुद सोचने की आदत खो सकते हैं. इन सवालों पर डॉ. विनोद शर्मा बताते हैं कि एआई अपने आप में न तो पूरी तरह फायदेमंद है और न ही नुकसानदेह. इसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि इसका इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है. पढ़ाई में एआई एक अच्छा टूल बन सकता है, लेकिन बच्चों को इसका सही इस्तेमाल सिखाना जरूरी है.
डॉ. विनोद शर्मा के अनुसार एआई पढ़ाई में काफी मददगार हो सकता है. इसकी मदद से अलग-अलग जानकारी को इकट्ठा किया जा सकता है, नए आइडिया विकसित किए जा सकते हैं और कई और तरह के काम किए जा सकते हैं. उन्होंने एआई की तुलना बंदूक से करते हुए कहा कि इसका इस्तेमाल खतरे और सुरक्षा दोनों के लिए हो सकता है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि इस्तेमाल कौन और किस उद्देश्य से कर रहा है. इसी तरह एआई का सही इस्तेमाल फायदेमंद हो सकता है, जबकि इसका गलत इस्तेमाल नुकसान भी पहुंचा सकता है.
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— Sambhava (@isambhava) October 13, 2026
बच्चों की क्रिटिकल थिंकिंग को कमजोर कर रहा AI?
क्रिटिकल थिंकिंग का मतलब किसी बात को एक्सेप्ट करना, नहीं बल्कि उसके पीछे के तर्क को समझना, सवाल पूछना और अलग-अलग पहलुओं का विश्लेषण करना है. इसमें सामान्य जवाबों से आगे जाकर किसी विषय को बेहतर तरीके से समझने और सही निष्कर्ष तक पहुंचने की कोशिश की जाती है. डॉ. शर्मा के अनुसार बच्चों में क्रिटिकल थिंकिंग विकसित करने के लिए खुद सीखने और सोचने की आदत जरूरी है. अगर बच्चे हर सवाल का जवाब सीधे एआई से लेने लगेंगे, तो उन्हें खुद सोचने और किसी विषय का विश्लेषण करने का मौका नहीं मिलेगा. उन्होंने कहा कि जब किसी को कुछ लिखना हो और एआई तैयार आर्टिकल दे दे या किसी सवाल का जवाब तुरंत मिल जाए तो व्यक्ति की सोचने की जरूरत कम हो जाएगी. ऐसे में क्रिटिकल थिंकिंग विकसित करना मुश्किल हो सकता है.
याद रखने की क्षमता पर डाल सकता है असर
डॉ. विनोद शर्मा के अनुसार याद रखने की प्रक्रिया एक तरह के अभ्यास की तरह काम करती है. जिस तरह फिजिकल एक्टिविटी बंद करने से शरीर पर असर पड़ता है, उसी तरह याद करने का अभ्यास छोड़ने से मेमोरी की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है. उन्होंने बताया कि किसी जानकारी को याद रखने में कई चीजें अहम भूमिका निभाती है. इसमें इंटरेस्ट, इमोशनल, विजुअल एसोसिएशन, क्रिएटिविटी और लॉजिक शामिल है. इन प्रक्रियाओं के जरिए जानकारी दिमाग से जुड़ी जुड़ती है और याद रखने में मदद मिलती है. अगर बच्चों को हर सवाल का जवाब पहले से तैयार मिल जाएगा और उन्हें खुद जानकारी याद करने या उसे दोहराने की जरूरत नहीं पड़ेगी, तो याद करने की प्रैक्टिस भी कम हो जाएगी. ऐसे में एआई पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता का असर उनकी नेचुरल मेमोरी पर पड़ सकता है.
AI से बच्चों का कंसंट्रेशन हो सकता है कम
पढ़ाई के दौरान ध्यान भटकना भी छात्रों के सामने एक बड़ी समस्या है. कई बार बच्चे कार्टून या टीवी देखते समय लंबे समय तक ध्यान लगाते हैं, लेकिन पढ़ाई करते वक्त छोटी सी आवाज से भी उनका ध्यान भटक जाता है. डॉ. शर्मा के अनुसार कंसंट्रेशन का संबंध इस बात से भी है कि बच्चे की सामने मौजूद विषय में कितनी रुचि है. जिस चीज में उनके दिलचस्पी होती है, उस पर वह ज्यादा ध्यान देते हैं. वहीं जिस विषय में रुचि नहीं है, उस पर ध्यान केंद्रित करना मुश्किल होता है. उन्होंने कहा कि अगर एआई की मदद से पढ़ाई को दिलचस्प बनाया जाता है और बच्चों को रोचक कंटेंट मिलता है, तो इससे उनका ध्यान केंद्रित करने में मदद मिल सकती है. यानी एआई का इस्तेमाल पढ़ाई को रोचक बनाने के लिए भी किया जा सकता है.
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बच्चों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल जरूरी
डॉ. विनोद शर्मा का कहना है कि बच्चों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन माध्यमों का इस्तेमाल जरूरी है. इनसे जानकारी हासिल करने और सीखने में मदद मिल सकती है. हालांकि इन माध्यमों का सही और गलत दोनों तरह से इस्तेमाल हो सकता है. उन्होंने कहा कि एआई के साथ बच्चों में अपनी समझ और वास्तविक बुद्धिमत्ता विकसित करना भी जरूरी है. बच्चों को स्मार्ट बनने के साथ-साथ इंटेलिजेंट बनाना भी जरूरी है. अगर वह तकनीक पर पूरी तरह निर्भर हो जाए तो इसका असर उनकी सीखने की प्रक्रिया पर पड़ सकता है. इसलिए एआई या डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल समझदारी से करना चाहिए
पढ़ाई में कौन से काम बच्चों को खुद करने चाहिए
डॉ. शर्मा के अनुसार पढ़ाई के कुछ बुनियादी काम ऐसे हैं जिन्हें बच्चों को खुद करना चाहिए. इनमें किसी विषय को पढ़ना, जानकारी को याद रखना, उनका विश्लेषण करना और प्रैक्टिकल तरीके से सोचना शामिल है. बच्चों को खुद लिखने, समझने और अपनी कल्पना शक्ति का इस्तेमाल करने का मौका मिलना चाहिए. पढ़ाई में जानकारी हासिल करने के साथ उसे समझने और अपने ज्ञान का हिस्सा बनना भी जरूरी है. वहीं एआई और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल रिसर्च करके जानकारी हासिल करने और विषय को समझने में मदद लेने के लिए किया जा सकता है.
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