भयंकर बढ़ गई डीजल की डिमांड, 15 दिनों में खर्च 36.5 लाख टन ईंधन

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  • अक्टूबर के पहले पखवाड़े में डीजल खपत 2.7 करोड़ बैरल हुई.
  • त्योहारी सीजन, कृषि कार्य और बिजली मांग से खपत बढ़ी.
  • तेल कंपनियों को घाटा, जल्द ईंधन महंगा होने की आशंका.

ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के स्तर पर पहुंच चुकी है. इस दौरान देश में जिस हिसाब से डीजल की डिमांड बढ़ रही है, उसने तेल कंपनियों की टेंशन बढ़ा दी है. बता दें कि अक्टूबर के शुरुआती 15 दिनों में भारत ने 36.5 लाख मीट्रिक टन फूंक दिए. यानी कि महज 15 दिनों में देश में 2.7 करोड़ बैरल डीजल की भारी-भरकम खपत हो चुकी है. एक तरफ ईरान और अमेरिका के बीच तनाव जारी है, यूक्रेन-रूस के बीच भी जंग छिड़ी हुई है, जिससे मार्केट में क्रूड की सप्लाई में ही दिक्कतें आ रही हैं. ऊपर से घरेलू स्तर पर जिस तेजी से इसकी डिमांड बढ़ रही है, उसने सरकार और तेल कंपनियों के लिए भी संकट पैदा कर दी है. इससे आने वाले समय में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो रहा है. 

क्यों एकाएक इतनी बढ़ गई डीजल की डिमांड?

त्योहारी सीजन के दौरान देश में डिमांड काफी ज्यादा बढ़ी हुई है, जिससे लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन काम जोरो पर है. सितंबर में अगस्त के मुकाबले ट्रकों की बिक्री में 33.57% का इजाफा हुआ है. इससे पता चलता है कि सड़कों पर डीजल वाहनों की आवाजाही बढ़ी है. इस दौरान बिजली की भी मांग बढ़ी है, जिसे पूरा करने के लिए बैकअप के तौर पर डीजल से चलने वाले जनरेटरों का इस्तेमाल किया जा रहा है. ऊपर से अभी खेती का भी सीजन है. अक्टूबर के महीने में खरीफ फसलों की कटाई और रबी फसलों की बुवाई होती है. इसके चलते खेतों में ट्रैक्टरों और पंपसेटों के लिए डीजल की खपत काफी बढ़ जाती है.

तेल कंपनियों को हो रहा घाटा

आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर के पहले पखवाड़े में सरकारी ईंधन कंपनियों द्वारा डीजल की बिक्री बढ़कर 3.65 मिलियन मीट्रिक टन (लगभग 27 मिलियन बैरल) हो गई है, जो सितंबर में इसी अवधि के मुकाबले लगभग 26.4% और एक साल पहले की तुलना में 25.4% अधिक है.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडियन फाउंडेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च एंड ट्रेनिंग के सीनियर फेलो, एसपी सिंह ने कहा, “कृषि क्षेत्र से मांग बढ़ने के कारण डीजल की खपत में इजाफा हो रहा है और त्योहारी सीजन की मांग की वजह से परिवहन गतिविधियों में भी तेजी आई है.” इधर, सरकारी तेल कंपनियां खुदरा उपभोक्ताओं को बाजार भाव से कम दर पर ईंधन बेच रही हैं, जिससे उन्हें प्रति लीटर डीजल पर करीब 20 रुपये का भारी-भरकम नुकसान हो रहा है. 

क्या पेट्रोल-डीजल के बढ़ेंगे दाम?

पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों और रेटिंग एजेंसियों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में ईंध्धन महंगा हो सकता है. पश्चिम एशिया संकट के चलते सरकारी तेल कंपनियों को हर दिन करोड़ों का नुकसान हो रहा है. ऐसे में अगर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 110 डॉलर के आसपास बनी रहीं, तो त्योहारों के ठीक बाद घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के रेट बढ़ाए जा सकते हैं. 

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