15 घंटे की उड़ान और खाने को कुछ नहीं, अब ग्राहक को 50000 देगी ये एयरलाइन

afecb455cb33f634bb1ea3528cd2a46217927768451201346 original


जब भी कोई यात्री लंबी दूरी का सफर तय करता है, तो उसे मील (भोजन) की जरूरत तो होती ही है. लेकिन क्या हो जब 15 घंटे की फ्लाइट में यात्री और उसके परिवार को भूखा रखा जाए? ऐसा ही एक मामला हाल ही में सामने आया है. जिसमें सिंगापुर एयरलाइंस ने दिल्ली की मेलबर्न तक करीब 15 घंटे की उड़ान के दौरान यात्री और उसके परिवार को पर्याप्त खाना नहीं दिया.

जिसकी शिकायत यात्री ने पंजाब राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में की, तो आयोग ने मामले में एयरलाइंस की सेवा में लापरवाही का दोषी माना. जिसके बाद एयरलाइंस पर मानसिक परेशानी और शिकायत के लिए हुए खर्च के बदले 50,000 का मुआवजा देने का आदेश दिया.

क्या है पूरा मामला?
दरअसल जसप्रीत सिंह की पत्नी, सास और 11 महीने की बेटी के साथ 4 मार्च 2020 को सिंगापुर एयरलाइंस की फ्लाइट से दिल्ली से मेलबर्न गए थे. जसप्रीत सिंह का आरोप था कि 15 घंटे की यात्रा के दौरान एयरलाइन के कर्मचारियों ने उनके परिवार को पर्याप्त खाना नहीं दिया. उनकी छोटी बच्ची के लिए दूध भी उपलब्ध नहीं कराया गया.

इसके बाद जसप्रीत ने एयरलाइन को ईमेल करके शिकायत की. शुरुआत में एयरलाइन ने मामले की जांच करने की बात कही, लेकिन बाद में जवाब दिया कि परिवार की ओर से शाकाहारी या विशेष भोजन की मांग नहीं की गई थी. एयरलाइन ने उन्हें अपने ट्रैवल एजेंट से संपर्क करने की सलाह दी.

जिला आयोग में आया मामला
पहले मामले की शिकायत एयरलाइंस से की गई, जब वहां से संतोषजनक समाधान नहीं मिला, तब जसप्रीत सिंह ने रूपनगर के जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने टिकट के 1.25 लाख रुपये वापस करने और 10 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग की. जनवरी 2023 में जिला आयोग ने एयरलाइन और ट्रैवल एजेंट को टिकट का पैसा 7% सालाना ब्याज के साथ लौटाने, 25,000 रुपये मुआवजा देने और 11,000 रुपये कानूनी खर्च के रूप में चुकाने का आदेश दिया था. इसके खिलाफ सिंगापुर एयरलाइंस ने राज्य आयोग में अपील की.

एयरलाइन ने पेश की सफाई
सिंगापुर एयरलाइंस ने कहा कि यात्रियों ने पहले से किसी विशेष भोजन की मांग नहीं की थी और उन्हें एयरलाइन के नियमित मेन्यू के अनुसार खाना दिया गया था. हालांकि राज्य आयोग ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया. आयोग ने कहा कि विशेष भोजन की मांग नहीं किए जाने का मतलब ये नहीं है कि एयरलाइन लंबी उड़ान के दौरान यात्रियों को सामान्य खाना देने की जिम्मेदारी से मुक्त हो जाती है. आयोग ने ये भी कहा कि एयरलाइन पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सकी, जिससे ये साबित हो सके कि परिवार को पर्याप्त भोजन दिया गया था.

बदली गई मुआवजे की रकम
एयरलाइन की पाई के बाद राज्य आयोग ने माना कि परिवार को हुई परेशानी, खासकर 11 महीने की बच्ची के साथ यात्रा करने की स्थिति, मुआवजे की हकदार थी. लेकिन आयोग ने ये भी ध्यान दिया कि परिवार अपनी यात्रा पूरी कर चुका था. ऐसे में पूरे टिकट का पैसा वापस करने का आदेश देना जरूरत से ज्यादा सख्त होगा.

इसलिए आयोग ने पहले दिए गए राहत संबंधी आदेश में बदलाव करते हुए मानसिक परेशानी और उत्पीड़न के लिए कुल 50,000 रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया. इसके अलावा कानूनी खर्च भी देना होगा.

ये भी पढ़ें: 2030 तक भारत में मिलेंगी 35 करोड़ नई नौकरियां, खत्म होगी बेरोजगारी- रिपोर्ट



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *