2027 वनडे वर्ल्ड कप पास आ रहा है, वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल के लिए टीम इंडिया का समीकरण बिगड़ा हुआ नजर आ रहा है. वहीं टी20 में श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली एक नई टीम तैयार हो रही है. मगर तीनों फॉर्मेट में जब भी गेंदबाजी लाइन-अप को लीड करने की बात आती है, तो जसप्रीत बुमराह को सबसे आगे कर दिया जाता है.
बुमराह लगातार चोटिल होते रहते हैं, तीनों फॉर्मेट में खेल पाना उनके लिए संभव नहीं है. मोहम्मद सिराज को टेस्ट में दूसरे मेन तेज गेंदबाज का दर्जा दिया जाता है, लेकिन व्हाइट बॉल टीमों में उनका कुछ अता-पता नहीं है. बुमराह पर बहुत अधिक निर्भरता भी BCCI और टीम मैनेजमेंट के लिए सिर दर्द बन चुकी है. तो यहां ऐसे 3 कारणों के बारे में जानिए, क्यों बुमराह टीम के मेन गेंदबाज होते हुए भी BCCI को लगातार टेंशन दे रहे हैं.
वनडे सीरीज मिस करने का क्या मतलब
2027 वनडे वर्ल्ड कप से पहले भारतीय टीम के ज्यादा मैच नहीं बचे हैं. 4 नवंबर-15 नवंबर तक भारत को न्यूजीलैंड के साथ पांच वनडे खेलने हैं. मगर रिपोर्ट्स अनुसार बुमराह इस सीरीज में नहीं खेलेंगे क्योंकि मैनेजमेंट उन्हें टेस्ट सीरीज के लिए तैयार करना चाहता है. न्यूजीलैंड सीरीज के बाद टीम इंडिया के द्विपक्षीय शृंखलाओं में सिर्फ 6 ODI मैच बचे होंगे. सबसे बड़ा सवाल है कि क्या बुमराह सिर्फ 6 मैचों में वनडे वर्ल्ड कप की तैयारियों को दुरुस्त कर लेंगे.
वर्कलोड नाम का भूत बुमराह और बीसीसीआई की टेंशन बढ़ा रहा है. ध्यान रहे कि बुमराह 2025 चैंपियंस ट्रॉफी में भी नहीं खेल पाए थे. हालांकि उनके बिना भी टीम इंडिया विजेता बनी थी, क्योंकि मोहम्मद शमी ने 5 मैचों में 9 विकेट झटके थे. मगर इस बार लग रहा है कि शमी टीम इंडिया का हिस्सा नहीं होंगे. ऐसे में बुमराह वनडे फॉर्मेट के लिए अब खुद को 100 परसेंट फिट नहीं करेंगे तो कब करेंगे?
बहुत ज्यादा निर्भरता
यह बात किसी से छुपी नहीं है कि टीम इंडिया का तेज गेंदबाजी अटैक बहुत हद तक जसप्रीत बुमराह पर निर्भर करता है. टी20 में वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने मयंक यादव और अन्य भारतीय बॉलर्स की खूब कुटाई की है. बुमराह इस सीरीज में खेल रहे होते तो हालत शायद 2-2 से बराबरी वाले ना बनते.
बुमराह होते तो श्रीलंका के खिलाफ शायद टेस्ट सीरीज में भारत 2-0 से जीता होता, क्योंकि अक्सर विदेशी टीमें खुद यह स्वीकारती रही हैं कि टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन में बुमराह के होने मात्र से उनपर एक अलग तरह का मानसिक दबाव होता है. इसलिए बुमराह का कोई दूसरा विकल्प न होना भी BCCI के लिए सिर दर्द बढ़ाने वाली बात है. बुमराह नहीं तो कौन?
वर्कलोड नाम का भूत
जसप्रीत बुमराह तीनों फॉर्मेट में नहीं खेल सकते हैं. इस बात को ना मानना जैसे सच्चाई से मुंह फेरना है. लगातार चोटिल होने की संभावना के चलते BCCI, सेलेक्शन कमिटी और टीम मैनेजमेंट को 10 बार सोचना पड़ता होगा कि बुमराह को किस मैच में उतारा जाए और किस मैच में नहीं. बेशक बुमराह किसी तुरुप के इक्के से कम नहीं, लेकिन बुमराह से पहले शायद ही किसी गेंदबाज के लिए ‘वर्कलोड’ शब्द इतना ट्रेंड में आया होगा.
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