भारत में त्यौहारी सीजन चल रहा है, जिसमें सोना और चांदी की डिमांड देश में बढ़ जाती है. इसी को देखते हुए भारत सरकार ने एक फैसला किया है, जिसके तहत देश में अगले छह महीनों में करीब चांदी के आयात को मंजूदी दे दी गई है. इस समयावधि में 6,500 मीट्रिक टन चांदी का आयात किया जाएगा.
इस फैसले के पीछे मकसद ये है कि त्यौहारों के सीजन में चांदी की डिमांड को पूरा किया जाए. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, जिन चार बुलियन कारोबारियों को आयात की अनुमति मिली है, उन्होंने इसकी जानकारी दी है.
भारत में कितनी चांदी होती है इम्पोर्ट?
भारत दुनिया में चांदी के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक है. देश अपनी जरूरत की 80% से ज्यादा चांदी विदेशों से आयात करता है. ऐसे में आयात बढ़ने से देश में चांदी की उपलब्धता बढ़ सकती है और कीमतों पर भी इसका असर पड़ सकता है.
कम है चांदी की मांग
बाजार के जानकारों के मुताबिक, अगले छह महीनों के लिए चांदी के आयात की इतनी बड़ी मंजूरी मिलने से कारोबारियों को हैरानी हुई है. क्योंकि चांदी की कीमतों में हाल में गिरावट आई है, जिसके चलते बाजार में इसकी मांग बाजारों में कम है. कारोबारियों का भी यही मानना है कि कीमतों में गिरावट होने के कारण चांदी की डिमांड कम हो गई है. कम कीमतों के चलते लोग चांदी में निवेश करने से बच रहे हैं.
चांदी के आयात पर लगी थी पाबंदियां
बता दें कि सरकार ने मई के बीच में चांदी के लगभग सभी रूपों के आयात पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया था. इसके बाद जून में चांदी के दाने और पाउडर को भी प्रतिबंधित कर दिया था. इनके आयात के लिए पहले से अनुमति लेना जरूरी कर दिया गया था. सरकार पिछले कुछ महीनों से सोने और चांदी जैसे कीमती धातुओं के आयात को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है. इसका उद्देश्य देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करना और रुपये को सहारा देना है.
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