अगर आप भी बीयर या सॉफ्ट ड्रिंक्स खरीदते हैं, तो एल्युमिनियम के कैन की कमी से जुड़ी यह खबर आपके लिए अहम है. भारत में बीयर या सॉफ्ट ड्रिंक्स बनाने वाली कंपनियों को पैकेजिंग के लिए कैन जुटाने में परेशानी हो रही है. जिसका असर बाजार में कुछ प्रोडक्ट्स की सप्लाई पर पड़ भी सकता है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कैन की कमी क्यों हो रही है और इसका असर ग्राहकों पर कितना पड़ेगा?
दरअसल, इसकी सबसे बड़ी वजह कैन की बढ़ती मांग, घरेलू प्रोडक्ट्स की सीमित क्षमता और पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण सप्लाई में आ रही रुकावटें हैं. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि बाजार से बीयर पूरी तरह गायाब हो रही है.
आखिर क्यों हो रही है बीयर के कैन की कमी?
भारत में बीयर और सॉफ्ट ड्रिंक्स की पैकेजिंग के लिए एल्युमिनियम के कैन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. पिछले दो सालों में इनकी बिक्री में हिस्सेदारी दोगुनी हो गई है. अब बीयर और सॉफ्ट ड्रिंक्स की कुल सालाना बिक्री में कैन की हिस्सेदारी एक चौथाई से ज्यादा बताई जा रही है.
यहां सबसे बड़ी परेशानी यह है कि बाजार में मांग बढ़ने के मुकाबले कैन का उत्पादन नहीं बढ़ पाया है. इसके अलावा, पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय सप्लाई प्रभावित होने से भी कंपनियों के सामने काफी मुश्किलें बढ़ गई हैं. ऐसे में बीयर और सॉफ्ट ड्रिंक्स बनाने वाली कंपनियों को अपने प्रोडक्ट्स की पैकेजिंग के लिए पर्याप्त कैन जुटाने में दिक्कत हो रही है.
देश में कैन का उत्पादन क्यों नहीं बढ़ पा रहा?
ब्रूअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महानिदेशक विनोद गिरी के मुताबिक, कंपनियों को उम्मीद थी कि देश में अतिरिक्त 60 करोड़ एल्युमिनियम कैन का उत्पादन होगा, लेकिन इसका सिर्फ आधा हिस्सा ही तैयार हो पाया. हालांकि, भारत की प्रमुख कैन निर्माता कंपनियां अपनी मौजूदा उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल कर चुकी हैं.
आमतौर पर उत्पादन बढ़ाने के लिए नई मशीनें और प्रोडक्शन लाइन लगानी पड़ती हैं, जिसमें करीब एक साल तक का समय लग सकता है. यही वजह है कि मांग बढ़ने के बावजूद बाजार में कैन की कमी जल्द से जल्द दूर करना मुमकिन नहीं है.
कैन की कमी दूर करने के लिए क्या कर रहीं कंपनियां?
दरअसल, घरेलू बाजार में पर्याप्त कैन नहीं मिलने के कारण कंपनियां दूसरे देशों से इनका आयात कर रही हैं. इस कमी को पूरा करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात (UAE), श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य देशों का सहारा लिया जा रहा है. बड़ी बात यह है कि विदेश से मंगाए जाने वाले यह कैन घरेलू कैन के मुकाबले करीब 25 से 30% तक महंगे पड़ रहे हैं, जिससे कंपनियों की पैकेजिंग लागत बढ़ रही है.
क्या बाजार से गायब हो जाएगी बीयर?
एल्युमिनियम के कैन की कमी का मतलब यह नहीं है कि देश में बीयर पूरी तरह खत्म हो जाएगी. फिलहाल, यह परेशानी मुख्य रूप से बीयर और सॉफ्ट ड्रिंक्स की नहीं, बल्कि उसे पैक करने के लिए इस्तेमाल होने वाले कैन की कमी का है. लेकिन इससे कुछ ब्रांडों की सप्लाई प्रभावित हो सकती है.
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